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नारी पर कहर बरपाएगा जलवायु परिवर्तन

ालवायु परिवर्तन भारत की अत्यंत गरीब महिलाओं के लिए मुसीबतें बढ़ाएगा। घरों में रोाना खाद्य और पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी अक्सर महिलाओं की होती है। इसके मद्देनजर जब जलवायु परिवर्तन की आपदा आएगी तो निम्न आय वाले परिवारों पर कहर बरपाएगी। महिलाओं को पानी तथा भोजन की तलाश में दूर-दूर तक जाना होगा। जलवायु परिवर्तन का महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जलवायु परिवर्तन स्वास्थ्य और विकास दोनों पर बुरा असर डालेगा। उदाहरण के लिए भारत में 56 प्रतिशत श्रमिक कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में अनेक लोग समुद्री तटवर्ती पर्यटन, मछली आदि जसे कार्यों से अपनी आजीविका कमाते हैं। इन लोगों को जलवायु परिवर्तन से अपनी आजीविका खोनी पड़ सकती है या नुकसान हो सकता है। मच्छर जनित रोग बढ़ेंगे विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से मच्छर जनित रोग बढ़ेंगे। विशेषकर मलेरिया, चिकनगुनिया तथा डेंगू का प्रकोप उन स्थानों पर भी हो रहा है, जहां ये पहले कभी नहीं थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन की उप क्षेत्रीय निदेशिका श्रीमती पूनम क्षेत्रपाल ने नेपाल और भूटान का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां 20 सालों से मलेरिया नहीं था और अब यहां इसका प्रकोप बढ़ रहा है। वर्ष 10 में डेंगू विश्व के सिर्फ 7 देशों में था जो वर्ष 10 में बढ़ कर 31 देशों में फैल गया। वर्ष 2001 में डेंगू 60 देशों में फैल चुका था। यही नहीं चिकनगुनिया उत्तरी अमेरिका व यूरोप में भी फैल रहा है । मलेरिया अभी मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिमी बंगाल तथा असम में है, लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से वर्ष 2050 तक यह कनार्टक, महाराष्ट्र तथा केरल,अरुणाचल प्रदेश, नागालैन्ड, मणिपुर तथा मिजोराम जसे राज्यों में भी फैल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में अभी भी यह फैल रहा है।

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