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..मुझे पता है वहां ईश्वर नहीं रहता

मानवीय अभिव्यक्ित का सर्वश्रेष्ठ रूप होती है कविता। इसके जरिये हर्ष हो या विषाद, करुणा हो या वेदना सब कुछ बड़े ही सहज तरीके से व्यक्त किया जा सकता है। रांची विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय के सभागार में सोमवार को आयोजित काव्य-पाठ में यही बात देखने-समझने को मिली।ड्ढr मुख्य अतिथि कुलपति ए के खान और अन्य अतिथियों की मौजूदगी में पूर्वाह्न् साढ़े ग्यारह बजे दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जाने-माने कवियों ने ऐसा मनोरम समां बांधा कि आयोजन में शिरकत कर रहा हर शख्स ‘वाह-वाह’ कर उठा। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में प्रख्यात कवि लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि कविता खुद ही अपनी परिभाषा होती है। इसे परिभाषित करने की आवश्यकता नहीं। इस दौरान उन्होंने अपनी कविता ‘हत्यारा’, ‘रोज कोई कम हो जाता है’, ‘अकेली औरत पार करना चाहती है सड़क’, ‘गनीमत है कि पूरी दुनिया एक़ ही शहर में नहीं रहती’ आदि सुनायी, जिन्हें काफी तारीफ मिली। कवियित्री कात्यायनी ने ‘बूढ़े आदमी की कविता’, ‘सात भाइयों के बीच चम्पा’, ‘हॉकी खेलतीं लड़कियां’, ‘लौटने के बारे में’, आम आदमी का प्यार’ और ‘एक फैसला फौरी तौर पर कविता के खिलाफ’ बड़े ही प्रभावशाली ढंग से पेश की। कवि लीलाधर मंडलोई का काव्य-पाठ ‘दीमक का घर’, ‘माया मिली न राम’, ‘मैंने एक कुबड़े को कांधा दिया’भी काफी असरकारक रहा। प्रख्यात कवि मंगलेश डबराल की कविता ‘ताकत की दुनिया’ ने भी खूब वाहवाही बटोरी। इसकी पंक्ित ‘मैं क्यों बनावाऊंगा मंदिर-मस्जिद, गिरजाघर या ऐसा ही कुछ, क्योंकि मुझे पता है वहां ईश्वर नहीं रहता’ की मुक्त कंठ से लोगों ने सराहना की। उनकी कविता ‘क्षोभ’ और ‘पुरानी तस्वीर’ भी अच्छी रही। काव्य पाठ में सर्वाधिक ताली मिली मशहूर कवि अष्टभुजा शुक्ल को। उन्होंने ‘ऊंट’, ‘उसी बोरे में’, ‘मां’, डूबना तो’ और ‘अकेली नयी चप्पल’ को बड़े ही ओजपूर्ण अंदाज में सुनाया। ‘डूबना तो किसी खाली बरतन की तरह, धीरे-धीरे अपने में कुछ भरते हुए’ को खूब तालियां मिलीं। कवि एकांत श्रीवास्तव की कविता ‘लोहा’ आदि सुनायी। साहित्यकाार खगेंद्र ठाकुर ने भी काव्य पाठ किया। ओम मिश्र और गौतम सान्याल ने कार्यक्रम का संचालन किया। केदारनाथ सिंह की अनुपस्थिति में उनकी कविता ‘उठो मेरे टूटे हुए धागों’ गोपाल सान्याल ने सुनायी। हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो रवि भूषण ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया।ड्ढr

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