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फिर नहीं हुई खरीदारी, योजना मद की राशि लौटाई

राजधानी में स्थित राज्य का एकमात्र पुलिस अस्पताल लाल फीताशाही का शिकार होकर रह गया है। अस्पताल के विकास और आवश्यक उपकरण की खरीदारी के लिए प्रति वर्ष सरकार द्वारा राज्य योजना मद से इस अस्पताल के भारी-भरकम राशि प्रदान की जाती है। वित्तीय वर्ष के अंत आते ही यह राशि बिना खर्च हुए सरेण्डर कर दी जाती है। इधर आईजी, प्रोविजन सुनीत कुमार का मानना है कि तकनीकी कारणों से ऐसा हुआ।ड्ढr ड्ढr राज्य के गृह सचिव ने अपने ज्ञापांक-6बी-1-007 दिनांक 21 नवम्बर-2007 के द्वारा आरक्षी अस्पताल, पटना के लिए रेडियो डाग्योनोसिस उपकरण (अल्ट्ऱासाउंड मशीन) एवं कलर डाप्लर की खरीदगी के लिए, 4लाख 4हजार 777 रुपए एवं आपरेशन थियेटर के लिए 3 लाख 1हजार 200 रुपए का आवंटन दिया था,पर कुछ दिन पूर्व यह राशि लौटा दी गई। वर्ष 2006-07 में भी आरक्षी अस्पताल के विकास के लिए राज्य योजना मद से 52 लाख 70 हजार रुपए का आवंटन मिला था। परन्तु बिना कोई खर्च किए वह भी राशि सरेण्डर कर दी गई थी। राज्य के एक मात्र आरक्षी अस्पताल के भवन का जीणर्ोद्धार का काम तो पूरा हो गया पर आवश्यक उपकरण के अभाव में यहां पुलिसकर्मियों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।ड्ढr ड्ढr आलम यह है कि मुठभेड़ों में घायल या असाध््य रोग से पीड़ित पुलिसकर्मियों को किसी नीजी अस्पताल या पीएमसीएच का सहारा लेना पड़ता है। इस संदर्भ में पूछे जाने पर आईजी, प्रोविजन सुनीत कुमार ने बताया कि अस्पताल को आवंटन देर से मिला। पुलिस अस्पताल में जो उपकरण लगाए जाने वाले थे वे सभी उन्नत किस्म के आयातित उपकरण हैं। इन्हे लगाने और उसकी जांच के बाद ही कंपनी को भुगतान करने का प्रावधान है। इस सारी प्रक्रिया में पांच-छह माह का समय लगता है। विलंब से आवंटन मिलने के कारण शार्ट-टर्म में यह काम संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले में क्रय समिति ने सारी प्रक्रिया पूरी कर ली थी पर मार्च के अंत तक उपकरणों का स्थापन और उसका जांच संभव नहीं था इस कारण राशि को सरेण्डर कर दिया गया।

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