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सरहुल की शोभायात्रा में उमड़ा सैलाब

झारखंड में प्रकृति पर्व सरहुल की धूम रही। प्रकृति के साधक मांदर की थाप पर दिनभर झूमते रहे। सरना स्थल पर साल वृक्ष की पूजा-अर्चना के बाद आदिवासी समुदाय के लोगों ने एक-दूसर को गुलाल लगाया, फूलखोंसी की और नये कपड़े पहन कर शोभायात्रा में शामिल होने के लिए निकल पड़े। आगे-आगे सरना झंडा और पीछे नाचते-गाते लोग। बच्चे, बूढ़े, औरत, मर्द, युवतियां और युवक सभी मदमस्त। कहीं झुमर, तो कहीं पाश्चात्य धुन पर थिरकती भीड़।ड्ढr मुख्य शोभायात्रा हातमा सरना स्थल से निकाली गयी, जो कचहरी रोड, मेन रोड होते हुए सिरमटोली सरना स्थल पहुंच कर समाप्त हुई। इससे पूर्व हातमा के पुजारी शिवलाल पाहन ने पूजा अर्चना करायी। शिवलाल अहले सुबह वह केकड़ा पकड़ने खेत में चले गये। वहां से एक नर और एक मादा केकड़ा पकड़ कर लाये, उसे चूल्हे के उपर रस्सी से बांध कर लटका दिया। मान्यता है कि जब आदिवासी समुदाय खेती के लिए जाते हैं, तो धान, मड़ुआ, गोंदली आदि की बोआई के वक्त इसी केकड़े को चूर कर खेत में बिखेर देते हैं। कहा जाता है कि जिस प्रकार केकड़ा अपने हाथ-पांव फैलाता है, उसी प्रकार खेती भी फैलती है। केकड़ा लाने के बाद पाहन दिनभर पारंपरिक ढंग से पूजा करते रहे। सुबह में ही कोटवार मंगरा मिर्धा और पनभोरा निऊरा के साथ तालाब गये। वहां स्नान कर दो घड़ों में पानी भरकर लाया, जिसे साल वृक्ष के नीचे पूजन स्थल पर पवित्रता के साथ रखा। काला मुर्गा नदी, नाला, गड्ढा को समर्पित होता है। लुपुंग(तांबी) मुर्गी होती है, जिसकी बलि पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दी जाती है। अंत में काली मुर्गी की बलि होती है, जो गांव के लोगों की भूत-पिशाच, शैतान से रक्षा के लिए है। पूजा में फेकनी पहनइन ने भी साथ दिया।ड्ढr नजारा अल्बर्ट एक्का चौक काड्ढr दिन के तीन बजे से ही विभिन्न इलाकों से जुलूस अलबर्ट एक्का चौक पहुंचने लगा। इसके बाद प्रकृति के साधकों का जनसैलाब उमड़ पडा। यहां पर श्रद्धालुओं ने एक-दूसर को गुलाल लगाया, फूलखोंसी की । युवा सरना समिति, नेवरी विकास, सरहुल सरना समिति भिट्ठा, नवीन सरना कॉलेज छात्रावास हरमू, हिंदपीढ़ी सरना प्रार्थना सभा, सरना छात्रावास हरमू, आदिवासी हॉस्टल, राजकीय पॉलिटेक्नीक, आदिवासी छात्र संघ, सिंदवार टोली, मोरहाबादी, आदिवासी हॉस्टल मोरहाबादी, सरना जागृति समिति का जुलूस पहुंचा। शाम 6.45 बजे कोकर क्षेत्र से झारखंड छात्र संघर्ष सरना समिति, युवा संगम तिरिल, सरना समिति खोरहा टोली, कोकर पाहन टोली, बिरसा क्लब का जुलूस पहुंचा। आकर्षण का केंद्र रहा आदिवासी हॉस्टल और सरना टोली हातमा का विहंगम जुलूस। इसमें शामिल लोगों ने ताशा, नगाड़ा और बैंजो पर बज रहे झारखंडी गीतों की धुन पर जमकर थिरके। विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों द्वारा लगाये गये स्टॉल में इनका जोरदार स्वागत किया गया। यहां पर प्रकृति के साधकों को चुड़ा, गुड़ और शरबत की व्यवस्था की गयी थी। मुख्य शोभायात्रा हातमा सरना स्थल से निकाली गयी, जो कचहरी रोड, मेन रोड होते हुए सिरमटोली सरना स्थल पहुंच कर समाप्त हुई।

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  • Web Title: सरहुल की शोभायात्रा में उमड़ा सैलाब