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कोयला और खनन मंत्रालयों में बदलाव

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई सी रड्डी से अदावता ले डूबी दसारिनारायण राव की कुर्सी और अपने मंत्रालय के कामकाज से अधिक फिल्मी सितारों की पार्टीा आयोजित करने में बिजी रहने के कारण सुब्बामणि रड्डी से छीन गया माइंस मंत्रालय का जिम्मा। कोयला मंत्रालय को देख रहे राज्य मंत्री दसारिनारायण राव के बार में कहा जाता है कि उनकी बढ़ती हुई ताकत से रड्डी परशान थे। वे उन्हें किसी भी हालत में मंत्री पद से हटवाना चाह रहे थे। राज्य के मुख्यमंत्री के राव कोहटाने के आग्रह के कारण ही उनसे कोयला मंत्रालय ले लिया गया। हालांकि कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि वे सिर्फ उन दिनों ही दफ्तर में तशरीफ लाते थे,ाब संसद चल रही होती थी। बाकी दिनो में उन्हें अपने दफ्तर या अपने मंत्रलाय के कामकाज की रत्तीभर भी फुर्सत नहीं होती थी। हालांकि राव के एक करीबी अफसर ने कहा कि ऐसा कतई नहीं है। वे बेहद संजीदा और सीरियस किस्म के इंसान है। हर काम को बहुत ही ईमानदारी से अंजाम देने में यकीन करते थे। केन्द्र में मंत्री बनने के बाद वे फिल्मी दुनिया से भी दूर हो गए थे। सनद रहे कि राव तेलुगु के चोटी के फिल्म निर्माता निर्देशक हैं। उन्होंने करीब 40 फिल्मों का निर्माण या निर्देशन किया। उन्होंने हिन्दी फिल्मों के गुजरे जमाने के स्टार जितेन्द्र के साथ मिलकर भी कुछ फिल्में बनाई। कहने वाले कहतेहैं कि राव की पहली पहली प्राथमिकता अपना निजी कारोबार ही रही। जाहिर है कि इसी के चलते कोयला सेक्टर पिछड़ता गया। कोयला माइंस से चोरी से लेकर कोयला माइंस में काम करने वाले मजदूरों की दशा को सुधारने की दिशा में कभी कोई ठोस पहल नहीं हो पाई। उनके बार में यह भी कहा जाता है कि राव अपने परिवार में चल रहे पंगे से भी काफी परशान थे। हाल ही में उनकी बहू ने ही उन पर आरोप जड़ दिये थे। वैसे, सूत्रों का कहना है कि आंध्र प्रदेश की सियासत में भी उनका राज्य के मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रड्डी के साथ लम्बे समय से छत्तीस का आंकड़ा चल रहा था। राव ने बीते सालों के दौरान रड्ड़ी पर उनका अपमान करने संबंधी कई बार बड़े कठोर बयान भी दिए। आंध्र प्रदेश में पिछले विधान सभा चुनाव में वे कांग्रेस की प्रचार कमेटी के अध्यक्ष भी थे। कांग्रेस की बेहतरीन सफलता के बाद ही उन्हें सोनिया गांधी ने मंत्री बनवाया था। उधर,सुब्बामणि रड्डी को कांग्रेस ने राज्य सभा में फिर से भले ही भेज दिया हो पर उन्हें मंत्री पद पर रहने नहीं दिया।

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