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ढोल मांदर बाजे र, बहुते मजा लागे र

ेंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा है कि प्रकृित पर्व सरहुल पूर देश में मनाया जाना चाहिये, ताकि पूरा भारत झारखंड के लोग और प्रकृति से प्रेम करना सीख सके। सहाय आठ अप्रैल को रांची यूनिवर्सिटी के पीजी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा विभाग में आयोजित सरहुल महोत्सव में बोल रहे थे।ड्ढr विशिष्ट अतिथि शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि हमार पूर्वज पारखी थे, जिन्होंने हमें प्रकृति पर्व सरहुल मनाना सिखाया। उन्होंने कहा कि जनजातीय भाषा में शिक्षकों के पद का सृजन किया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षा में जनजातीय भाषा की 30 अंकों की परीक्षा होगी। कार्यक्रम के अध्यक्ष वीसी प्रो एए खान ने कहा कि विकास के साथ संस्कृति का भी ख्याल रखना होगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ अंजनी श्रीवास्तव ने कहा कि क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा के विकास को लेकर सरकार गंभीर है।ड्ढr रांची की मेयर रमा खलखो ने कहा कि भाषा को जटिल नहीं बना कर इसे सरल बनाने से ही यह समृद्ध होगी।ड्ढr डिप्टी मेयर अजयनाथ शाहदेव ने कहा कि प्रकृति पर्व सरहुल हमेशा नये उमंग लेकर आता है। इससे पूर्व डॉ रामदयाल मुंडा एवं अशोक पागल ने सरहुल मंत्र का पाठ किया। विजय बैठा एवं बीएन तिवारी ने लोक गीत सुनाये। डॉ कुमारी बासंती ने अतिथियों का स्वागत किया और विशेश्वर सिंह मुंडा ने स्वागत गान प्रस्तुत किया।

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