अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लड़के तो लड़के हैं, चाहे बंदर ही क्यों न हों

ाॉनी खिलौना पिस्तौल, ट्रक व कार जसे खिलौने खेलने में मशगूल रहता है तो उसकी छोटी बहन को गुड्डा-गुड़िया का ब्याह रचना भाता है। ऐसा नहीं है कि बच्चों को सिखाया जाता हो कि लड़कियां कौन से खिलौने खेलें और लड़के कौन से। लड़कों और लड़कियों को अलग-अलग तरह के खिलौने पसंद आने का सबसे बड़ा कारण जीन है। डीएनए ही यह तय करता है कि लड़कों को कैसे खिलौने भाएंगे और कौन से लड़कियों को लुभाएंगे। यह बात एक नए अध्ययन में साबित हुई है कि खिलौनों के मामलों में भी लड़कों को पसंद थोड़ी मर्दानी होती है, फिर चाहे वे बंदर के बच्चे ही क्यों न हों। मनोवैज्ञानिक लंबे समय से इस धारणा को खारिा करते रहे हैं कि खिलौनों के मामले में बच्चों की पसंद-नापसंद जीन से निर्धारित भी हो सकती है। उनकी नजर में यह धारणा एकदम अवैज्ञानिक थी, लेकिन अमेरिका में हाल में हुए एक नए अध्ययन ने स्वाभाविक बनाम परिवेश आधारित व्यवहार को लेकर बहस को एक बार फिर गर्मा दिया है। अध्ययन में कहा गया है कि जब ट्रक व गन जसे खिलौनों और सॉफ्ट ट्वॉय में किसी को चुनने की बारी आए तो पसंद-नापसंद तय करना क्रोमोसोम पर निर्भर हो सकता है। बच्चों के स्वाभाविक व्यवहार में अंतर का पता लगाने के लिए तमाम अध्ययन हो चुके हैं। लेकिन तब तक बच्चों को अपने माता-पिता, दोस्तों या टेलीविजन आदि के जरिये खिलौनों के बार में जो भी जानकारी मिल चुकी होती है, उससे यह पता लगाना संभव नहीं लगता कि उनकी स्वाभाविक पसंद क्या होगी। इसलिए इस बार अटलांटा स्थित यर्क नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के किम वालेन के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने बंदरों पर यह अध्ययन किया कि क्या खिलौनों के बार में पसंद-नापसंद का लिंग से कोई लेना-देना है। ये देखकर उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा कि 11 नर बंदर सीधे ट्रक व इसी तरह के पहिये वाले खिलौनों की तरफ बढ़े। लड़कियों को पसंद आने वाले खिलौनों पर तो उन्होंने नजर भी नहीं डाली, जबकि 23 मादा महिलाएं ज्यादा उत्सुक स्वभाव की दिखीं जिन्होंने दोनों तरह के खिलौनों के प्रति रुचि दिखाई।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: लड़के तो लड़के हैं, चाहे बंदर ही क्यों न हों