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देशमुख पर नहीं थम रही अटकलें

या कांग्रेस में किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाने के लिए कभी कोई कमेटी बनती है? इस सवाल पर मंगलवार को पूरी कांग्रेस पार्टी में माथापच्ची चलती रही। रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा महाराष्ट्र में नेतृत्व परिवर्तन की खबरों से इनकार करने के बावजूद ऐसा यकीनन नहीं लग रहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस ने नए मुख्यमंत्री का विकल्प खंगालना बंद कर दिया। कारण मंगलवार को मीडिया में कांग्रेस के दो प्रवक्ताओं के बयान एक दूसरे के उलट थे। अलबत्ता महाराष्ट्र की प्रभारी महासचिव मार्गेट अल्वा ने अनौपचारिक सफाई दी कि देशमुख को हटाने के बाबत कोई कमेटी नहीं बनी और न ही राज्य की इंचार्ज होने की हैसियत से कांग्रेस अध्यक्ष ने उन्हें इस बाबत कुछ कुछ कहा। कांग्रेस में मीडिया मामलों के प्रभारी वीरप्पा मोइली ने भी इस बात से इनकार किया कि वह महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री बदलने के बारे में बनी किसी कमेटी में हैं। कांग्रेस के एक प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा ‘महाराष्ट्र ञ्फद्ग औपचारिक कमेटी नहीं है लेकिन पार्टी में ऐसी कमेटी की परंपरा है, जो समय- समय पर राज्य सरकारों के कामकाज की समीक्षा करती है।’ फिर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के बारे में भी एक कमेटी है लेकिन उसे कोई विशेष काम नहीं सौंपा गया है। दूसरी ओर पार्टी के दूसरे प्रवक्ता शकील अहमद ने भी किसी कमेटी की बात से इनकार किया। देशमुख के हटने और बने रहने को लेकर अलग अलग तर्क दिए जा रहे हैं। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष अक्टूबर तक है। दूसरा वहां विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री विरोधियों के भी अपने ही तर्क हैं, उनकी दलील है कि देशमुख के मुख्यमंत्री रहते बसपा की प्रचंड चुनौती के साथ ही दलित -मुसलिम व किसानों की नाराजगी दूर करने में जितनी देरी होगी, नुकसान उतना ही बढ़ेगा।

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