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काम-धाम नहीं, दफ्तर आइये, तनख्वाह पाइये

पथ निर्माण विभाग में मेकेनिकल डिवीजन के पास कोई काम नहीं है। रख-रखाव तथा इंजीनियरों- कर्मचारियों के वेतन पर सालाना एक करोड़ से ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है। इस डिवीजन के पास नामकुम, सिल्ली, हंसडीहा तथा मेदिनीनगर में चार हॉट मिक्स प्लांट है। वर्षो से ये प्लांट बेकार पड़े हैं। जानकर आश्चर्य होगा कि डालटनगंज में स्थापित हॉट मिक्स प्लांट की शुरुआत तक नहीं हुई। मतलब कभी धुआं नहीं निकला। आठ रोलर मशीन( वाहन) जंग खा रहे हैं। पोट होल रिपेयरिंग मशीन का भी कोई काम नहीं रह गया है। रफोमीटर से थोड़ा- बहुत काम लिया जा रहा है। अब ठेकेदारों को हॉट मिक्स प्लांट देकर मदद करने की तैयारी विभाग में हो रही है। सिल्ली में स्थापित प्लांट को तोरपा या खूंटी ले जाने की तैयारी चल रही है।ड्ढr खूंटी- तोरपा सड़क का निर्माण बड़ी लागत से हो रहा है। काम रड्डी बियन्ना को मिला है। काम में तेजी के लिए ठेकेदार ने विभाग से हॉट मिक्स प्लांट के लिए एप्रोच किया है। प्लांट देने की प्रक्रिया बढ़ी है। विभाग में चर्चा है कि बड़े काम में वैसे ही टेंडर में यह शर्त होता है कि ठेकेदार के पास हॉट मिक्स प्लांट होना चाहिए। अफसरों- इंजीनियरों की समझ है कि प्लांट काम तो करगा।ड्ढr मेकेनिकल डिवीजन में दर्जनों इंजीनियर - कर्मचारी दफ्तर आते - जाते हैं और महीना पूरा होने पर तनख्वाह उठाते हैं। महालेखाकार ने भी मेकननिकल डिाीवन के किसी काम के नहीं होने पर सवाल खड़ा किया है। जानकारों का कहना है कि आज की तारीख में एक हॉट मिक्स प्लांट बैठाने में करीब डेढ़ करोड़ लगता है। दस करोड़ की परिसंपत्तियां जंग खा रही हैं। विभागीय काम नहीं होने के कारण ही मेकेनिकल डिवीजन का यह हाल बना है। रांची और हाारीबाग में मेकेनिकल डिवीजन है। इस डिवीजन में कुल 172 स्वीकृत पदों के विरूद्ध फिलहाल 100 इंजीनियर- कर्मचारी हैं। इनमें एक एसइ, दो इइ, छह एइ 12 जेइ हैं। एसइ वेदकांत मिश्रा कहते हैं काम रहे तो आउटपुट भी मिलता है। हाल ही में नामकुम प्लांट से कुछ काम हुआ था।ड्ढr ं

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