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मुजफ्फरपुर में कई चापाकल सूखे

समय रहते यदि नहीं चेते तो आने वाले दिनों में उत्तर बिहार के चार प्रखंड में लोग पानी के लिए तरसेंगे। लिहाजा पेयजल से लेकर सिंचाई के लिए त्राहि-त्राहि करना पड़ेगा। इन इलाकों में पेयजल के लिए चापाकल, कुंआ तथा सिंचाई के लिए नलकूप पर प्रतिबंध की नौबत तक आ सकती है। सकरा समेत उत्तर बिहार के चार प्रखंड शुष्क क्षेत्र घोषित हो सकते हैं।ड्ढr ड्ढr भूगर्भ जल सव्रेक्षण प्रमंडल मुजफ्फरपुर के हाल के सव्रे में यह तथ्य उभर कर सामने आया है। विभाग के उप निदेशक विजय नारायण सिन्हा ने कहा कि इस रिपोर्ट के बाद नये सिर से सव्रे कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सव्रेक्षण के दौरान जल के रिचार्ज व ड्राफ्ट में अंतर आने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। विभाग इस दिशा में पहल कर रहा है। मुजफ्फरपुर के सकरा, वैशाली के जंदाहा, समस्तीपुर के पूसा व पूर्वी चंपारण के पकड़ी दयाल प्रखंड के सव्रेक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया है। यहां जल के रिचार्ज व ड्राफ्ट का अंतर 70 फीसदी से अधिक होने की बात सामने आयी है। उन्होंने कहा कि वाटर टेबुल बनाने के क्रम में ज्ञात हुआ है कि इन प्रखंडों में जितना पानी जमा होता है उससे 70 फीसदी अधिक पानी निकल रहा है।ड्ढr ड्ढr हालांकि उनका मानना है कि उत्तर बिहार में फिलहाल गंभीर जल संकट उत्पन्न नहीं होने वाला है। जहां तक गर्मी के दिनों में पेयजल की समस्या का सवाल है तो इसके लिए संबंधित विभाग दोषी है। गर्मी के दिनों में स्वाभाविक तौर पर हर वर्ष जलस्तर में गिरावट आती है लेकिन मौसम बदलते ही वहां की स्थिति सामन्य हो जाती है। गर्मी के दिनों में बिजली की कमी से भी शहरी क्षेत्र में पंप के नहीं चलने से जल संकट उत्पन्न होता है। अबतक उत्तर बिहार के जलस्तर में इतनी अधिक गिरावट नहीं आयी है कि आने वाले वर्षो में यहां के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेंगे।ं

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