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चैती छठ पर भी गंगा घाटों पर कूड़े का ढेर

चार दिवसीय महापर्व चैती छठ नौ अप्रैल से शुरू होगा पर गंगा घाटों पर कूड़े-कचर का अंबार लगा हुआ है। पानी कछार तक होने के कारण समाहरणालय घाट और अंटा घाट पर छठ व्रतियों की भारी भीड़ जुटती है। समाहरणालय घाट पर दूरदराज के गावों से काफी संख्या में लोग भगवान सूर्य को अघ्र्य देने आते हैं।ड्ढr ड्ढr इस घाट पर चैती छठ में भी मेला का नजारा रहता है। इसी घाट के बगल में स्थित अंटा घाट पर लोग व्रत करने आते हैं। इसके बावजूद इन घाटों की सफाई अब तक नहीं की गयी है। वैसे समाहरणालय घाट पर प्रत्येक सप्ताह स्वयंसेवी संस्था द्वारा गंगा आरती का आयोजन किया जाता है। अंटा घाट के पहुंच पथ की स्थिति नारकीय है। अंटा घाट में सब्जी मंडी रहने के कारण पहुंच पथ पर सड़ी सब्जियों का अंबार लगा रहता है। कूड़े के ढेर से निकल रही दरुगध के कारण नाक पर रुमाल रखे बिना धारा तक पहुंचना संभव नहीं है। इसी घाट पर बिहार राज्य जल पर्षद का ड्रेनेज पम्पिंग प्लांट है जिससे नाले का गंदा पानी गंगा में गिरता है।गंदगी तो ऐसी कि खाना खा कर जाएं तो उबाल आ जाए। अगर यही स्थिति रही तो छठ व्रतियों को कूड़े का ढेर पार कर धारा तक जाना पड़ेगा। ड्रेनेज पम्पिंग प्लांट से लेकर धारा तक का ढलान काफी खतरनाक है। पहुंच पथ पर आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। छठ की तैयारी जोरों परड्ढr पटना (सं.सू.) । पटना में चैती छठ की तैयारी जोरों से चल रही है। ब़ुधवार को होने वाले नाहाय-खाए को लेकर पटना के घाटों की स्थानीय लोगों ने सफाई की। वहीं दूसरी और गंगा उस पार से किसान भाई राजधानी में कद्दू ले पहुंचे। बाजार में कद्दू के खरीदारों की भीड़ रही और और कद्दू के भाव भी दोगुनी से अधिक रही। साथ हीगुरुवार को होने वाले लोहर के लिए लिए भी लोगों ने खरीदारी की । बाजार में फुटपाथी दुकानें सज गयीं हैं जो पहला अघ्र्य तक गुलजार रहेगा।ड्ढr ड्ढr सरहुल पर्व मनाया गयाड्ढr पटना (हि.प्र.)। खद्दी-बाहा, सरहुल-करमा पूजा समिति के तत्वावधान में मंगलवार को राजधानी के सरना स्थल मांझी थाना में सरहुल पर्व मनाया गया। आदिवासियों ने पारम्परिक तौर-तरीके से पर्व माया। लोगों ने ढोल-नगाडों की थाप पर पारम्परिक नृत्य किया। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष भीखम उरांव भी उपस्थित थे। आदिवासियों ने जमकर दावत भी उड़ायी। शाम होते ही आदिवासियों की जुटान शुरू हो गयी। सभी गंवई अंदाज में अपने संस्कार को प्रतिबिम्बित करने के अंदाज में जुटे थे। इनका नृत्य देखते ही बनता था। देर रात तक नाच-गान और दावत का सिलसिला चला।ं

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