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राजनीति में फिल्मी दुनिया की मायावी भूमिका

गुजरे जमाने के सुपरस्टार राजेश खन्ना और हाल में बालीवुड में अपनी 40 वर्ष पूरे कर चुके अमिताभ बच्चन जैसे कई कलाकरों ने चुनावी राजनीति से लगभग किनारा कर लिया है। वहीं शत्रुघन सिन्हा, राजबब्बर ,जयाप्रदा समेत अनेक पुराने कलाकारों ने इस बार के लोकसभा चुनाव में बतौर प्रत्याशी उतरकर फिल्मी दुनिया की भूमिका बरकरार रखी है। इस बार भी लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशी अथवा प्रचारक के रूप में फिल्मी कलाकारों की मदद ले रखी है और कुछ ने तो इसके लिए टेलीविजन कलाकारों से भी काम चलाने में गुरेज नहीं किया। इसकी एक झलक कांग्रेस द्वारा छोटे पर्दे के मशहूर हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव को उत्तर प्रदेश से अपना प्रत्याशी बनाने की कोशिश में कामयाब नहीं होने पर अग्रणी एंकर ,शेखर सुमन को बिहार के पटना साहिब लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में खड़ा करने में दिखती है।वे शत्रुघन सिन्हा के खिलाफ मैदान में उतरे हैं। लेकिन इस बार एक विसंगति यह नजर आ रही है कि जिस मायानगरी मुम्बई में बालीवुड का संसार बसा हुआ है उसकी छह लोकसभा सीटों में से किसी पर वषर्ो बाद कोई बड़ा अथवा छोटा फिल्म कलाकार उम्मीदवार नहीं बना है। पिछले लोकसभा चुनाव में मुम्बई की एक सीट से दिवंगत फिल्म अभिनेता सुनील दत्त और एक अन्य सीट से फिल्म अभिनेता गोविन्दा जीते थे। सुनील दत्त के निधन के बाद उनकी पुत्री प्रिया दत्त उसी सीट पर उपचुनाव जीतने के बाद इस बार भी चुनाव मैदान में उतरी है। लेकिन 14 वीं लोकसभा की बैठक में लगभग लगातार अनुपस्थित रहे गोविन्दा ने संभवत चुनाव से तौबा कर ली है। वहीं आंध्र प्रदेश समेत लगभग सभी दक्षिण भारतीय रायों में फिल्मी हस्तियों के राजनीति में आकर छा जाने की पुरानी परम्परा रही है। तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार चिरंजीवी ने तो इस बार बाकायदा अपनी नई पार्टी, प्रजा रायम गठित कर आंध्र प्रदेश में अन्य सभी दलों के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। आंध्र प्रदेश में सक्रिय और तीसरे मोर्चे के प्रमुख घटक,तेलुगु देशम की स्थापना ही इस पार्टी के मौजूदा कर्णधार चन्द्रबाबू नायडू के ससुर दिवंगत फिल्मकार एन.टी.रामाराव ने की थी जबकि तमिलनाडु में दिवंगत फिल्मकार एम.जी.रामचन्द्रन द्वारा गठित अन्ना द्रमुक की बागडोर अभी जयललिता ने सम्भाल रखी है जो उनके साथ कई तमिल फिल्मों में नायिका रही थीं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सखा के रूप में सामने आकर इलाहाबाद से 1में लोकसभा चुनाव जीत चुके अमिताभ बच्चन ने भी खुद को भारतीय राजनीति में भूचाल ला देने वाले बोफोर्स तोप खरीद घोटाला के बाद प्रत्यक्ष चुनावी राजनीति से दूर कर लिया। पर समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह से उनकी जगजाहिर मित्रता उन्हें राजनीति से लंबे समय तक दूर रख सकेगी इसमें लोगों को बड़ा संशय है। उनकी पत्नी जया बच्चन तो बाकायदा उत्तर प्रदेश से सपा की प्रत्याशी के बतौर दो बार रायसभा चुनाव जीत चुकी हैं और इस बार चुनाव में पार्टी की स्टार प्रचारक भी हैं।समाजवादी पार्टी फिल्म अभिनेत्री एवं सांसद जयाप्रदा को उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल रामपुर सीट से फिर खड़ा करने के साथ ही भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता मनोज तिवारी को इसी राय की गोरखपुर सीट पर अपना प्रत्याशी बनाने की विधिवत घोषणा पहले ही की जा चुकी है। सपा ने अभिनेता संजय दत्त को भी लखनऊ से प्रत्याशी बनाने की पूरी कोशिश की और जब दत्त को चुनाव लड़ने के लिए उच्चतम न्यायालय से हरी झंडी नहीं मिली तो उसने पूर्व मिस इंडिया एवं फिल्म अभिनेत्री नफीसा अली को उतार दिया। तैराकी की राष्ट्रीय चैम्पियन रह चुकी नफीसा अली ने पिछली बार कोलकाता की एक लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी के खिलाफ अपनी राजनीतिक किस्मत आजमाई थी पर तब वह हार गई थीं। दत्त को मुम्बई में 10 के दशक में हुए दंगों के दौरान अवैध आग्नेयास्त्र रखने के अपराध में सजायाफ्ता होने के मद्देनजर चुनाव लड़ने की अनुमति तो नहीं मिली पर अब वह सपा के राष्ट्रीय महासचिव बनकर स्टार प्रचारक की भूमिका में आ गए हैं।उनके साथ उनकी पत्नी मान्यता दत्त भी सपा के प्रचार में जुटी हैं जिन्हें बालीवुड की कुछेक फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाने का गौरव हासिल है। गौरतलब है कि सपा ने लखनऊ सीट पर पहले भी फिल्म कलाकारों को उतारा है। उसने वर्ष 1े लोकसभा चुनाव में इस सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के खिलाफ राज बब्बर को उतारा था और वहां से फिर एक बार फिल्मकार मुजफ्फर अली को प्रत्याशी बनाया था पर दोनों परास्त हो गए थे।अली बाद में सपा को छोड. बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए और अब वे चुनावी राजनीति से अलग हो चुके हैं। जबकि पिछली बार सपा प्रत्याशी के रूप में आगरा से जीते बब्बर इस बार उत्तर प्रदेश की ही फतेहपुर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। 10 के दशक में कांग्रेस के स्टार प्रचारक रहे और लोकसभा की दक्षिण दिल्ली सीट से इसी पार्टी की टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके राजेश खन्ना चुनावी राजनीति से तो क्या फिल्मो में अभिनय से भी लगभग किनारा कर चुके हैं। वषर्ो बाद हाल में आई उनकी एक फिल्म,बेवफा बाक्स आफिस पर नहीं चली और राजनीतिक हल्कों में तय मान लिया गया कि वह अब चुनाव में भी नहीं चल पाएंगे। ंग्रेस के लिए कई बार प्रचार कर चुके ट्रैजडी किंग दिलीप कुमार के नजदीकी सूत्रों ने बताया कि खराब स्वास्थ्य के कारण उनके इस बार चुनावी प्रचार में भाग लेने की कोई योजना नहीं है। पर कांग्रेस के प्रचार के लिए फिल्म कलाकारों का कोई टोटा नहीं है। लोकप्रिय अभिनेता सलमान खान,उत्तर प्रदेश के उन्नाव निर्वाचन क्षेत्र जाकर कांग्रेस प्रत्याशी अनु टंडन का प्रचार कर चुके हैं। शाहरूख खान,प्रीति जिन्टा आदि अनके अन्य कलाकारों के भी चुनाव प्रचार में भाग लेने की योजना है। जानकार सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने इस बार शाहरूख खान को मुम्बई से और जिन्टा को हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर सीट से अपना प्रत्याशी बनाने की पेशकश की थी। पर दोनों ने ही यह प्रस्ताव अस्वीकार करना श्रेयस्कर माना। करीब 100 हिन्दी,भोजपुरी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में अभिनयकर चुकी नगमा पिछले लोकसभा चुनाव में ही कांग्रेस में शामिल हो गई थी और वह इस बार मुम्बई अथवा मध्य प्रदेश की भोपाल या इन्दौर सीट से चुनाव लड़ने के लिए काफी उत्सुक थीं। गोविन्दा ने इस बार उत्तर मुम्बई की लोकसभा सीट से खुद चुनाव लड़ने से इंकार कर वहां से नगमा को कांग्रेस प्रत्याशी बनाने का सुझाव दिया था। पर पार्टी ने नगमा को किसी सीट से अपना टिकट नहीं दिया है जिससे क्षुब्ध होकर उन्होंने कांग्रेस में पैसा और भाई भतीजावाद का जोर चलने का आरोप लगाते हुए उसके लिए प्रचार करने से भी मना कर दिया है। हालांकि बाद में उन्होंने टीवी पर दिए इस बयान का यह कहकर खंडन किया कि उनकी बातों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया था। मुम्बई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह के अनुसार लोकसभा चुनाव में मुम्बई से पार्टी प्रत्याशी बनाए जाने के लिए उनसे भोजपुरी फिल्म अभिनेता रवि किशन के समर्थकों ने भी सम्पर्क किया है। पर रवि किशन ने स्पष्ट किया है कि वह खुद उम्मीदवार बने बगैर कांग्रेस का प्रचार करने के लिए तैयार हैं। पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में राजस्थान से जीते फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र के तो इस बार चुनाव नहीं लड़ने की चर्चा है पर उनकी पत्नी एवं राय सभा सदस्य हेमा मालिनी पार्टी के प्रचार कार्य में जोरों से जुटी हुई हैं। खबर है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के आग्रह पर फिल्म कलाकार परेश रावल भी भाजपा का प्रचार करने के लिए राजी हो गए हैं।

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