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आसमान छू सकते हैं चावल के दाम

भारतीय बासमती की दुनिया में धाक के बाद अब परमल चावल के लिए भी निर्यात के दरवाजे खुल सकते हैं। यूरोपीय देशों में अच्छी-खासी मांग को देखते हुए सरकार परमल-1121 किस्म के एक्सपोर्ट परमिट जारी करने के मूड में है। यदि एसा हो जाता है तो निर्यातकों की चांदी हो जाएगी। लेकिन किसानों को इससे कोई फायदा नहीं होने वाला, क्योंकि वे अपनी फसल अक्तूबर में ही बेच चुके हैं। एक अनुमान के अनुसार यदि अनुमति मिल जाती है तो कम से कम दो लाख टन चावल का निर्यात होगा। इससे घरलू बाजार में चावल के दाम 15 से 20 फीसदी तक बढ़ सकते हैं। पहले से चलता है गोरखधंधा परमल-1121 के दाने की लंबाई भी आम चावल के दाने से ज्यादा होती है, इसलिए बड़े पैमाने पर इसकी बासमती में मिलावट कर निर्यात किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार यह मिलावट 45 फीसदी तक है। कुछ निर्यातक तो बासमती का ठप्पा लगाकर सिर्फ इस चावल का ही निर्यात कर रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती का नाम भी खराब हो रहा है। पिछले साल रूस ने भी कुछ समय के लिए भारत से चावल निर्यात पर रोक लगा दी थी। बासमती में मिलावट के लिए अन्य किस्में भी धड़ल्ले से इस्तेमाल की जाती हैं, इनमें पीआर-11, पीआर-14, पीआर-16, सुगन्धा, साथी और पेप्सी बासमती (देसी बासमती) भी शामिल हैं। पंजाब-हरियाणा में होती है पैदावार परमल-1121 की पैदावार चार राज्यों में ही होती है। उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल को मिलाकर चारों राज्य में कुल 6 लाख टन औसतन हर साल इस चावल की पैदावार होती है। इसमें करीब साढ़ 4 लाख टन का निर्यात कर दिया जाता है। जबकि देश में बासमती की कुल पदावार 1.5 लाख मीट्रिक टन ही है। आल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के सदस्य एमपीजिंदल ने बताया कि काफी दिनों से हमारी मांग थी कि चावल की इस किस्म के निर्यात को मंजूरी दी जाए। अब यह मांग पूरी होती दिख रही है।

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