class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कॉमरड से बहस

ॉमरड इस बात से मतोद व्यक्त कर रहे थे कि उनकी पार्टी तिब्बत मामले में आंख मूंदकर चीन का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा- नहीं साथी, आप साम्राज्यवादियों, नव उदारवादियों के प्रचार का शिकार हो कर निम्न पूंजीवादी विभ्रमों के शिकार हो गए हैं, जसे कि लेनिन ने ‘क्या करं?’ पुस्तिका में लिखा है कि पढ़े-लिखे मध्यमवर्गीय लोगों की वर्ग चेतना अक्सर इस तरह के विभ्रमों का शिकार होकर सर्वहारा के वर्गशत्रुओं का साथ देने पर उन्हें विवश कर देती है।ड्ढr मैंने कहा- अच्छा इस तरह के विभ्रमों से मध्यवर्गीय लोग कैसे निकले? उन्होंने कहा ‘यह लेनिन ने नहीं बताया, लेकिन स्टालिन ने कहा है..’ वे रुक गए। मैंने कहा- क्या कहा स्टालिन ने? उन्होंने कहा- स्टालिन ने यह नहीं बताया कि ऐसे मध्यमवर्गीयों को क्या करना चाहिए, उन्होंने यह बताया है कि कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों को ऐसे लोगों से कैसे निपटना चाहिए। मैंने कहा- मैं समझ गया। उन्होंने कहा- क्या समझ गए? मैंने कहा- स्टालिन ने क्या कहा होगा? स्टालिन के पास हर समस्या का एक ही इलाज था। उन्होंने कहा- यही तो आपका निम्नपूंजीवादी विचार है। आप जानते हैं कि कई कॉमरड जिन्हें कॉमरड स्टालिन ने मौत की सजा सुनाई, वे मरते-मरते ‘कॉमरड स्टालिन जिन्दाबाद’ के नार लगा रहे थे। मैंने कहा- माफ करना भाई साहब, मुझसे आप इस किस्म की उम्मीद न करं, मैं अपनी निम्नपूंजीवादी दुनिया में ही खुश हूं। उन्होंने कहा- हां, तो मैं कह रहा था कि ऐसा नहीं है हमने तिब्बत के मामले पर चीन को बिना सोचे-समझे समर्थन दे डाला। हमारी पार्टी कांग्रेस में कई घंटे तक इस पर तीखी बहस हुई, लगभग छह घंटे की लगातार बहस के बाद ही पार्टी ने इस पर अपनी लाइन तय की। जानते हैं हमारी पार्टी में सच्चा लोकतंत्र है, हम बिना सोचे समझे बिना चर्चा, विमर्श के अपनी लाइन नहीं बनाते। मैंने पूछा- किस मुद्दे पर बहस हुई? उन्होंने कहा- मुख्य मुद्दा यह था कि तिब्बत चीन का ‘अभिन्न’ अंग है या ‘अविच्छिन्न’ अंग है। मैंने पूछा- दोनों में फर्क क्या है? उन्होंने कहा- साथी, मैं बताता हूं, प्लेखानोव ने लिखा है कि ‘अविच्छिन्नता.. एक ऐसा गुण है जो..।’

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: कॉमरड से बहस