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कोसी की लोक गाथाओं को बचाने की जरूरत

रेल मंत्री लालू प्रसाद ने बिहार विशेषकर कोसी की पैराणिक लोक गाथा-भगैत, लोरिक, अल्लाह-रूदल को संग्रहित कर विरासत में मिली इस अमूल्य परम्परा को बचाने की जरूरत बतायी है। सहरसा के पटेल मैदान में बुधवार से शुरू तीन दिवसीय बिहार भगैत सम्मेलन का फीता काट उद्घाटन करने के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ को संबोधित करते उन्होंने इतिहास और साहित्यकारों से अपील की कि पूर्वजों की गाथाओं को संग्रहित करं और इसमें सरकार सहयोग करगी।ड्ढr ड्ढr उन्होंने भगवान बुद्ध के दिये संदेश ‘बुद्धं शरणं गच्छामि दोहराते हुए कहा कि आज लोगों में अनुशासन, एकता और चतुरता तीनों समाप्त हो गया है। यही कारण है कि बिहार पीछे चल रहा है और जिसने बुद्ध के संदेश को अपनाया वह देश आगे चल रहा है। विशेष ट्रेन से लगभग 12.30 बजे सहरसा पहुंचे रलमंत्री सीधे भगैत स्थल पटेल मैदान पहुंचे। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व मंत्री शंकर प्र. टेकरीवाल, पूर्व सांसद सूर्य नारायण यादव, अध्यक्षता कर रहे संत योगीराज बाबा, स्वामी स्वर्गानंद बाबा कारू खिरहरि विकास परिषद और भगैत आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। रल मंत्री ने राजनीतिक भाषणों से बचते हुए कहा कि छोटी जातियों में भी बड़े-बड़े संत महापुरुष हुए जिनका चमत्कार अद्भूत है। कारू खिरहरि सरीखे संत हर वर्ग हर जाति में हैं लेकिन उनका कोई इतिहास नहीं। श्री प्रसाद ने कहा कि दूसर के आस्था और धर्म पर अंगुली उठाने का अधिकार किसी को नहीं है लेकिन कुछ राजनीतिक पार्टियां हमारी समता अखंडता एवं संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश में रहती है। हालांकि उन्होंने चलते-चलते अपने समर्थकों को यह पाठ पढ़ा दिया कि आज बिहार में राज-पाठ अपनी गलतियों से गया। जिन्हें हमनें जगाया वहीं हमें सुला दिया। उन्होंने कहा कि हम ऊंची जाति के विरोधी नहीं लेकिन दबे-कुचले के सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करंगे। रलवे को हमने मुनाफा में डाल कर पूरी दुनियां में भारत का शान बढ़ाया है।ड्ढr ड्ढr बिहार सरकार पर निशाना साधते कहा कि आज केन्द्र से इस राज्य के विकास के लिए प्रयाप्त राशि भेज रहें हैं लेकिन यह पैसा कहां जा रहा है पता नहीं। उन्होंने लोगों से रलवे के कल-कारखानों के लिए जमीन देने की अपील करते हुए कहा कि रल के कई बड़े कारखाना इस क्षेत्र में लगने जा रहा है और इस क्षेत्र का कायाकल्प हो जायेगा। बाद में रल मंत्री ने मंच पर ही भगैत गायन का आनंद उठाया। फिर मुख्य पंडाल में जाकर पूजा-अर्चना करने के बाद पटना के लिए रवाना हो गये।

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