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दलों, नेताओं ने किया आरक्षण का स्वागत

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में गुरुवार को केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (आेबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी, लेकिन इस वर्ग की क्रीमी लेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने के निर्देश दिए। लोक जनशक्ित पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने अन्य पिछड़े वर्गो को उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देने के लिए न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने एक वक्तव्य में कहा कि वे पहले से ही इसका समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि इसमें क्रीमी लेयर को भी रखा जाता तो अच्छा होता। पासवान ने उच्च जातियों के गरीब लोगों को उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देने का सुझाव दिया। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने भी आरक्षण की मंजूरी के फैसले का स्वागत किया और कहा कि उच्च वर्ग के गरीब तबके को भी इस प्रकार का लाभ दिया जाना चाहिए। मायावती ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकांश लोग आर्थिक एवं शैक्षिक रूप से तरक्की नहीं कर सके हैं, इसलिए उन्हें इस प्रकार के लाभ देने की सख्त आवश्यकता थी और उन्हें आरक्षण का फायदा मिलना ही चाहिए था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह केद्र सरकार को पत्र लिखकर मांग कर रही हैं कि उच्च वर्ग के गरीब वर्ग को भी उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण दिया जाय ताकि उनके बच्चे भी उच्च शिक्षा ग्रहण कर अपना जीवन स्तर सुधारने के साथ-साथ देश की प्रगति में भी सहायक बन सकें। माक्र्सवादी पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने क्रीमी लेयर संबंधी कोर्ट के फैसले का भी स्वागत किया। कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा है कि शिक्षण संस्थानों में बढ़ाई गई सीटों के कारण समाज में कोई भी कटुता उत्पन्न नहीं होगी और सभी को बराबर मौके मिलेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सभी पार्टियों ने स्वागत किया है। कांग्रेस ने इसे ऐतिहासिक करार दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने भी उच्चतम न्यायालय द्वारा केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को वैध ठहराने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों की जीत है। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने अपनी प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा कि इस आरक्षण की बहुत आवश्यकता थी, लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्री अजरुन सिंह के रवैये के कारण आरक्षण कानून को लागू करने में समस्याएं पैदा हुई थीं। उन्होंने कहा कि आरक्षण का विरोध करनेवालों के बारे में यदि थोड़ा सा भी विचार किया गया होता तो आरक्षण कानून को बिना किसी विवाद के अमल में लाया जा सकता था। जावडेकर ने याद दिलाया कि भाजपा समेत सभी राजनीतिक दलों ने संसद में आरक्षण के विधेयक का समर्थन किया था। जावडेकर इस सुझाव से सहमत नहीं हैं कि राजनीतिक दल सस्ती लोकप्रियता की होड़ में लगे हैं और कहा कि गरीब और पिछडे वगर्ो के लिए आरक्षण एक प्राकृतिक न्याय है। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग जैसे एक बड़े प्रमुख वर्ग को कोई नजरदांज नही कर सकता और भाजपा हमेशा सामाजिक न्याय की भावना की पक्षधर रही है। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी अन्य पिछड़े वगर्ो को केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक विज्ञप्ति में आरक्षण को क्रीमी लेयर को बाहर रखने के फैसले का भी स्वागत किया है और कहा है कि इससे वास्तविक जरुरतमंदों को इसका फायदा मिल सकेगा। पार्टी ने केन्द्र सरकार से आसन्न शैक्षिक सत्र से ही इसे लागू करने के उपाय करने की मांग की है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी विज्ञप्ति में फैसले का स्वागत करते हुए इस नीति को निजी और अल्पसंख्यक संस्थानों में भी लागू करने की मांग की तथा आरक्षण विरोधियों से उच्चतम न्यायालय के फैसले को अच्छी भावना से साथ ग्रहण करने की अपील की।ं

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