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दूर करो खतरा

माता वैष्णो देवी के मंदिर में श्रद्धालु पहाड़ों पर चढ़कर माता के दर्शन करने जाते हैं। रास्ते में बुजुर्गो, माताओं, बहनों, बहू-बेटियों, बच्चों की इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि पहाड़ों पर चढ़ते समय रास्ते में कई जगह ग्रिल रैलिंग टूटे हुए हैं। श्रद्धालुओं को चलते समय गिरने का खतरा बना रहता है। प्रशासन अधिकारियों को जल्द से जल्द इन्हें ठीक करवाना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को गिरने का खतरा टाला जा सके।ड्ढr नन्हे पहलवान, बाजार सीता राम, दिल्ली गरीबों की दाल-रोटी? छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट से केन्द्र सरकार के समस्त श्रेणी के कर्मचारियों की लॉटरी खुल गई। इनके मासिक वेतन में भारी वृद्धि हो गई है। चुनावी वर्ष होने के कारण सरकार ने अपने कर्मचारियों को यह बेमिसाल तोहफा दिया है। वैसे भी सरकारी कर्मचारी आठ घंटे की डय़ूटी में से केवल एक-दो घंटे ही काम करते हैं, बाकी समय वे गप्पों में बिताते हैं। सरकार से इनको विभिन्न प्रकार की अन्य-आर्थिक सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं। गरीब जनता को न रोगार मिलता है, न र्का, न रोटी, न बिजली-पानी मिलते हैं, न मकान मिलता है, न सुरक्षा है। यहाँ तक कि दाल-रोटी भी अब इनके नसीब से दूर भाग रही है।ड्ढr किशन लाल कर्दम, जे. जे. कालोनी, नई दिल्ली मनुवादी लठैत बने टिकैत 3 अप्रैल को सम्पादकीय में ‘टिकैत की सियासत’ पढ़ा। जातिवाद से जूझ रहे भारतीय लोकतंत्र को आज ऐसे ही मीडिया की जरूरत है। मायावती के प्रति टिकैत की टिप्पणी से सहा ही अन्दाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे मनुवादी लठैतों के खेतों में काम करने वाली दलित महिलाओं को जातिवाद से कितना जूझना पड़ता होगा? टिकैत द्वारा माफीा मांगना ही पर्याप्त नहीं है। बेहतर होगा कि स्वयं को किसान नेता मानने वाले टिकैत उन दलित महिलाओं (बेटियों) के अधिकारों के लिए भी आंदोलन चलाएं, जो दबंग किसानों के खेतों में आए दिन बलात्कार का शिकार होती रहती हैं।ड्ढr ओ. पी. सोनिक, दिलशाद कालोनी, दिल्ली अकेला राजबीर अपराधी नहीं एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी राजबीर सिंह की हत्या एक दुखद हादसा है। इस हादसे और दुखद बना दिया पुलिस अधिकारियों के रवैए ने। राजबीर को राजकीय सम्मान दिया जाना चाहिए था। उनकी अंतिम यात्रा में शामिल न रहकर पुलिस उच्चाधिकारियों ने उन्हें अघोषित अपराधी बना दिया। अगर एसीपी राजबीर अपराधी तुल्य हैं, तो उनके उच्चाधिकारी भी उतने ही कसूरवार हैं, जिन्होंने उनका इस्तेमाल किया।ड्ढr मनोज शर्मा, श्रीनिवासपुरी, नई दिल्ली खेती की रक्षा से खाद्य सुरक्षा गंगा की धारा मर नहीं, इसके लिए जरूरी है कि हिमालय के वनों की सतत रक्षा की जाए। क्या यह नहीं हो सकता कि देश की खाद्य सुरक्षा के लिए उत्तर के विशाल गंगा-यमुना के मैदान को भी आज, कल तथा भावी पीढ़ी को ध्यान में रखकर केवल कृषि के लिए संरक्षित किया जाए। सतत पोषणीय विकास की अवधारणा भी यही है कि विलासितावादी फसलों तथा उद्योगों को उपजाऊ जमीनों पर न लगाया जाए।ड्ढr भरत भरवंशी, थलीसैंण, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड पोस्टर पर बिल अभी दिल्ली सरकार ने पोस्टर पर नया बिल पास किया। इससे दिल्ली में पोस्टरबाजी से फैली गंदगी और गलत होड़ से शायद कुछ राहत मिलेगी। कायदे कानूनों की जिस तरह से हमार देश में धज्जियां उड़ाई जाती हैं, ऐसी शायद कहीं नहीं। भ्रष्टाचार की इस भयंकर तूफानी आंधी में यह सब कैसे मुमकिन हो सकता है? क्योंकि सफाई कर्मचारियों की संख्या लगातार घटाई जा रही है। इस बेहद गंभीर मसले पर सरकार व जनता को सोचने और कुछ करने की सख्त जरूरत है।ड्ढr वेद, मामूरपुर, नरला, दिल्लीं

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