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आईटी पेशेवरों को साथ रखने की कोशिश

अपने से तेजी से दूरी बनाते पेशेवरों को अपने पास किसी भी कीमत पर रखने के इरादे से अब बैंकों और आईटी कंपनियों ने एक नई रणनीति तैयार की है। इन्हें यकीन है कि बात-बात पर उनसे पल्ला झाड़ने वाले पेशेवर अब उनका यूं ही साथ नहीं छोड़ देंगे। दरअसल आईटी और बैंकों ने टियर- टू और टियर- थ्री शहरों में प्रमुख बिल्डरों के आवासीय काम्पलेक्सों में 50-60 तक फ्लैट लीज पर लेकर अपने पेशेवरों को देने की पहल की है। विप्रो, इंफोसिस, सत्यम, जेनपेक्ट जसी कंपनियों ने बैंगलूर से कुछ हटकर बसे शहरों में बनाए जा रहे शहरों में बन रहे प्रमुख बिल्डरों में फ्लैट लेने शुरू कर दिए हैं। इनमें उनके पेशेवर मजे-मजे में रहने भी लगे हैं। बीपीओ एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रवक्ता दीपक कपूर ने कहा कि अब आईटी, बीपीओ, बैंक वगैरह में जल्दी-ाल्दी कंपनियों को छोड़ने के मामले कम सामने आएंगे। उन्होंने भी कहा कि जब आईटी कंपनियों के पेशेवर एक साथ कहीं पर रहेंगे तो वे निश्चित रूप से वहां के समाज के करीब अपने को पाएंगे। जानकारों का कहना है कि राजधानी के करीब ग्रेटर नोएडा में सक्रिय आईटी कंपनियां भी ग्रेटर नोएडा में बन रहे विभिन्न रीयल एस्टेट कंपनियों के काम्पलेक्सों में किराए पर काफी प्लैट एक साथ ले रही हैं। इनमें एचसीएल,सीएससी के अलावा भी तमाम मझोले दज्रे की कंपनियां हैं। सीएससी के सूत्रों ने बताया कि वे भी इन संभावनाओं को पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनके इंदौर और चेन्नई में काम करने वाले पेशेवर एक साथ ही रह सकें। सीएससी दुनिया की चोटी की आईटी कंपनियो में से एक मानी जाती है। भारत में ही इसके करीब दस हाार पेशेवर काम कर रहे हैं। हालांकि जानकारों ने यह भी बताया कि आईटी और बीपीओ सेक्टर की प्रमुख कंपनियों ने अपने पेशेवरों को एक साथ रखने की कोशिश उस वक्त करनी शुरू की जब आईटी सेक्टर में मंदी का दौर चल रहा है। अब पेशेवरों में अपनी कंपनी को छोड़ने को लेकर पहले वाली मारामारी भी नहीं दिख रही पहले की तरह से। इस बीच, एबीएन एमरो बैंक और एचएसबीसी बैंक भी मुम्बई के करीब वसई और थाणे में डीएस कुलकर्णी और हीरानंदानी समूहों से बात कर रहे हैं ताकि वे उन्हें अपने आवासीय काम्पलेक्सों के कम से कम 50 फ्लैट किराए पर दे दे।

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