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कांव-कांव

प्रदेश में सरकार बनवाने वाली पार्टियों में से एक पार्टी ने अपने शिष्यों के लिए पाठशाला खोली। इसमें क्लास लेने के लिए दिल्ली से आये सचमुच के राजनीति के प्रोफेसर। इन दिनों यह पाठशाला और उसमें पढ़ाई गयी बातें चर्चा में हैं। पढ़ाई क्या हो रही है इसको लेकर लोगों में दिलचस्पी है। सरकार से जुड़े लोग भी जानना चाह रहे हैं कि प्रोफेसर साहब आखिर कौन-सा गुरुमंत्र दे रहे हैं। पर उन्हें कौन बताये कि अर भइया ये और कुछ भी नहीं, विकास और भ्रष्टाचार को दूर करने का मंत्र है। प्रोफेसर साहब अपने व्याख्यान में बार-बार शिष्यों को यही कहते हैं कि सरकार के पास सिर्फ तीन ही काम हैं- बैठक, भोजन और विश्राम। इसलिए इसे गिराना ही चाहिए। इधर जनता कहती है कि इ सब किचकिच तंग आ चुके हैं। बच्चा लोग भी दू का पहाड़ा छोड़ पूछता है कि सरकार कब गिरगी। बड़ी भाग से और न जाने कितने तिकड़म से यह सरकार बनी। उसे कह दिया कि फेल है। अर कोई मजाक है क्या? डेढ़ साल में एतना काम हुआ है, जेतना छह साल में नय हुआ होगा। तबो कहते हैं सरकार फेल है। धन्य हैं प्रोफेसर साहब, जब रांची आते हैं रूला कर चले जाते हैं।

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