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पाठय़क्रम ही नहीं परीक्षा प्रणाली भी समान हो

शिक्षाविद् इस बात पर एकराय हैं कि यूपी बोर्ड का पाठय़क्रम काफी बोझिल है और इसे कुछ कम करके केन्द्रीय बोर्ड (सीबीएसई व आईसीएसई) के स्तर पर लाया जाए लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है कि परीक्षा प्रणाली में ही आमूल-चूल परिवर्तन किए जाएँ। राजकीय जुबिली इण्टर कॉलेज के प्राचार्य ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह भदौरिया का कहना है कि इण्टर तक तो परीक्षा होनी ही नहीं चाहिए बल्कि ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया जाए। इससे छात्रों में हीनभावना नहीं पनपेगी और यह तनाव के कारण पनपने वाली आत्महत्या की प्रवृत्ति रोकने में भी सहायक होगी। क्वीन्स इण्टर कॉलेज के प्राचार्य व माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र भी मानते हैं कि ग्रेडिंग सिस्टम हो और मासिक मूल्यांकन कराया जाए। इससे आत्महत्याएँ भी रुकेंगी और नकल भी। हालाँकि वे आगाह करते हैं कि पाठय़क्रम कम करने व बदलने में केन्द्रीय बोर्ड की पूरी नकल न की जाए सिर्फ अच्छी बातें ही ली जाएँ। इसके लिए शिक्षाविदों से भी सुझाव लिए जाएँ। मण्डलीय मनोविज्ञानशाला के वैज्ञानिक डॉ. कविराज का मत है कि केन्द्रीय बोर्ड में अधिकतर शहरी व सम्पन्न छात्र पढ़ते हैं और यूपी बोर्ड में ग्रामीण। इसलिए दोनों को समान शिक्षा मिले इसलिए पाठय़क्रम में एकरूपता जरूरी है।ड्ढr उधर राजधानी में एक कार्यक्रम में भाग लेने आई पूर्व भारत सुन्दरी, अभिनेत्री व समाजसेवी नफीसा अली ने यह बात हिन्दुस्तान से बातचीत में कहीं। हाल में शहर में कई छात्रों के आत्महत्या करनेड्ढr के पीछे एक कारण फिल्मों व टीवी सीरियल को माना जा रहा है लेकिन नफीसा अली इससे इत्तिफाक नहीं रखतीं। आत्महत्या के पीछे उन्होंने ज्यादा से ज्यादा अंक लाने का शिक्षकों व अभिभावकों का दबाव बताया।

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