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महादलितों के विकास की नई योजना

राज्य सरकार महादलितों के विकास की एक नई योजना शुरू करने जा रही है। 288 करोड़ की इस योजना के माध्यम से महादलित जातियों के जीवन को पूरी तरह बदलने की कवायद शुरू की जाएगी।समाज कल्याण विभाग की ओर से तैयार इस योजना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खास दिलचस्पी है।ड्ढr ड्ढr इस योजना को तैयार करने का काम पिछले कई महीनों से हो रहा था और अब इसे घोषित करने के लिए 14 अप्रैल को अम्बेदकर जयंती का दिन चुना गया है। योजना को लेकर राज्य सरकार के आला अधिकारी अभी बिल्कुल चुप हैं और 14 अप्रैल के पहले इसके बार में कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। इसकी सारी विशेषताओं की घोषणा अम्बेदकर जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री करंगे। समाज कल्याण विभाग के आला अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि इसे तैयार करने के पहले महादलित जातियों के पूर जीवन का अध्ययन किया गया है। इससे पता चला है कि इन्हें केन्द्र बनाकर अब तक कुछ भी नहीं किया गया है। कल्याणकारी योजनाओं का नाम मात्र का ही हिस्सा इन तक पहुंच पाया है। खासकर इन जातियों की बच्चियों की शिक्षा को लेकर सरकार बहुत चिन्तित है और इस योजना में खास उपाय किए जा रहे हैं। लगभग डेढ़ दर्जन जातियों को महादलित की श्रेणी में रखा गया है और इनमें सबसे खराब स्थिति मुसहर जाति के लोगों की है। जनता दरबार में आनेवाली जविप्र से जुड़ीं शिकायतों पर तीन माह में कार्रवाई होगीड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। जन वितरण प्रणाली से जुड़ी जनता दरबार में आने वाली शिकायतों पर 0 दिन के भीतर कार्रवाई होगी। गरीबों के घर तक अनाज और किरासन सही-सलामत पहुंचाने के लिए सरकार ने यह नया प्रयोग किया है। शिकायतों के निपटारे की जिम्मेदारी जिला आपूर्ति पदाधिकारियों (डीएसओ) पर होगी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने जिलों में तैनात अपने अधिकारियों को यह समझा दिया है कि पूरी कार्रवाई पर मुख्यसचिव की सीधी नजर है। लिहाजा काम को टरकाने की बजाय उसे मुस्तैदी से निबटाना ही पड़ेगा।ड्ढr ड्ढr जनता दरबार में आम तौर पर राशन दुकानों पर अनाज या किरासन नहीं मिलने, तय कीमत से अधिक दर पर अनाज देने और बगैर सूचना के ही दुकानों के बन्द रखे जाने की शिकायतें अधिक होती हैं। विभाग का मानना है कि शिकायतों को निबटाने के लिए अधिकारियों को राशन दुकानों तक जाना पड़ेगा। इससे बगैर किसी अतिरिक्त प्रयास के ही अनाज और किरासन के उठाव और वितरण का पूरा नेटवर्क खुद ब खुद दुरुस्त हो जायेगा। विभाग ने जनता दरबार से जुड़े मामलों को निबटाने के लिए जवाबदेह अधिकारियों की सूची भी मुख्य सचिव के कार्यालय को सौंप दी है। इससे जन शिकायतों की मॉनीटरिंग के क्रम में मुख्य सचिव भी सीधे-सीधे दोषी अधिकारी को चिह्न्ति कर सकेंगे। अधिकारियों को हरेक पखवारे जन शिकायतों की सुनवाई और उस पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी भेजनी होगी।

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