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अब मस्ती की पाठशाला में पढ़ेंगे छोटे बच्चे

प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब परम्परागत शिक्षा से मुक्ति मिल जाएगी। अब वह मस्ती की पाठशाला में पढ़ेंगे तथा खेलकूद, गीत, संगीत और कला के साथ आधुनिक परिवेश से रूबरू होंगे। न उन्हें पहाड़ा रटना होगा और न ही उन्हें एबीसीडी सिखाने की जल्दबाजी की जाएगी। उन पर होमवर्क का बोझ भी नहीं लादा जाएगा।ड्ढr राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एससीईआरटी) की पूरी टीम कक्षा एक से आठ तक के पाठय़क्रम को अंतिम रूप देने में जुटी है। एक जुलाई से नया शैक्षिक शुरू होगा। सब कुछ ठीक रहा तो मई के अंत तक नया पाठय़क्रम छपने के लिए भेजा जाएगा। करीब डेढ़ हाार शिक्षकों, शिक्षा विशेषज्ञों, अभिभावकों के साथ सामाजिक विचार-विमर्श के बाद नए पाठय़क्रम की रूपरखा तैयार की गई है। इसका आधार राष्ट्रीय पाठय़चर्या नीति -2005 है, जिसमें ‘बच्चों को समझ का चस्का’ लगाने की बात कही गई है, जिसमें उन्हें सीखने में मदद मिले। प्रारंभिक शिक्षा के नए पाठय़क्रम में भाषा पर अधिक जोर दिया गया है। शुरुआती पढ़ाई मातृभाषा में देना अनिवार्य होगा। अंग्रेजी का ज्ञान कक्षा-4 के बाद दिया जाएगा। हालाँकि इस बार में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं किया गया है। गणित के बहाने बच्चों में तार्किक ढंग से सोचने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। विज्ञान की शिक्षा बच्चों के परिवेश के अनुकूल होगी।ड्ढr

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