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हचा सब्सिडी खत्म करने पर जोर

हा सब्सिडी के विरोध में भारतीय मुस्लिमों की आवाज और बुलंद हो गई है। कई मुस्लिम संगठन सरकार से प्रार्थना कर रहे हैं कि वह हा यात्रा के मामले में मलेशियाई मॉडल को अपनाए क्योंकि सब्सिडी ने लाभ पहुंचाने की बजाए समुदाय को नुकसान ही पहुंचाया है। केंद्र सरकार हर साल तकरीबन 300 करोड़ रुपये बतौर सब्सिडी हा यात्रा पर खर्च करती है। यात्रियों को सऊदी अरब आने-ााने के विमान के किराए पर छूट दी जाती है। उधर मलेशिया के ताबंग हाजी मॉडल में हर संभावित हा यात्री एक विशेष कोष में रुपया जमा कराता है जसे भारत में पब्लिक प्रोविडेंट फंड की व्यवस्था है। इस प्रकार मलेशियाई मुस्लिम भारतीय हाजियों के विपरीत अपनी यात्रा के लिए खुद पैसा जुटाते हैं। राज्यसभा के उपसभापति के. रहमान खान ने बताया, ‘हमारे प्रस्ताव देने के बाद प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर केबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। वह ऐसे बदलाव के इच्छुक हैं, जो मुसलमानों को सशक्त करगा।’ हाल ही में खान ने सांसदों के एक दल के साथ प्रधानमंत्री से मिलकर उनसे सब्सिडी हटाने का आग्रह किया। इसके अलावा पांच राज्य हा समितियों ने भी केंद्र से हा कानून में संशोधन का आग्रह किया है। अभी गुरुवार को ही दिल्ली की जामा मसिद के इमाम अहमद बुखारी भी सब्सिडी विरोधी खेमे में शामिल हो गए थे। उन्होंने एयर इंडिया के एकाधिकार को खत्म करने के लिए हा कानून में संशोधन की अपील की। मुसलमानों को ऐसा लगता है कि एयर इंडिया उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं करती। सिर्फ एयर इंडिया की हा यात्रियों को लाने व ले जाने का काम करती है।

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