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महंगाई बेलगाम, सभी हलकान

आसमान छूती महंगाई में पेट्रोल-डीाल की कीमतों ने आग में घी डालने का काम किया है। विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में हुई बढ़ोत्तरी का बड़ा कारण है पेट्रोल और डीाल की कीमतों में आयी तेजी। केंद्र में यूपीए सरकार के गठन के बाद से पेट्रोल और डीाल की कीमत में प्रति लीटर दस रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। इसका नजीता यह हुआ कि माल ढुलाई से लेकर परिवहन का खर्च भी बढ़ा गया। केंद्र में जब यूपीए की सरकार बनी थी, उस समय पेट्रोल की दर 37.32 रुपये और डीाल की कीमत 24.88 रुपये थी। वर्तमान में पेट्रोल की कीमत 46.00 रुपये और डीाल 34.12 रुपये प्रति लीटर है। इसका सीधा प्रभाव माल ढुलाई और परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जिस रफ्तार से तेल की कीमत बढ़ी है, उससे माल ढुलाई की कीमत भी बढ़ गयी है। व्यापारी ढुलाई में खर्च की गयी राशि भी सामान की कीमत में जोड़ कर दर का निर्धारण करते हैं। अवधिपेट्रोल डीाल (लीटर)ड्ढr 1004 से 04.11.2004 तक37.32 रुपये24.88 रुपयेड्ढr 05.11.2004 से 15.11.2004 तक3पये27.05 रुपयेड्ढr 16.11.2004 से जून 2005 तक38.35 रुपये27.05 रुपयेड्ढr जून 2005 से 03.08.2005 तक40.पये20 रुपयेड्ढr 04.08.2005 से 05.06.2006 तक34.पये31.64 रुपयेड्ढr 06.06.2006 से 2006 तक47.पये35.15 रुपयेड्ढr वर्तमान दर46.00 रुपये35.14 रुपये आग में घी डाला पेट्रोल-डीाल की बढ़ी कीमत ने । महंगाई ने आम लोगों की समस्या बढ़ा दी है, पर बाजार में मनमानी कीमतें वसूले जाने के कारण उपभोक्ताओं की परशानी और भी बढ़ गयी है। राजधानी के अलग-अलग इलाके में खुदरा मूल्य भी अलग-अलग है। किसी इलाके में कीमत थोड़ी कम है, तो कहीं एक से दो रुपये ज्यादा। उपभोक्ताओं को इस बात की जानकारी नहीं है कि आखिर कीमतों में इतना अंतर क्यों है। बाजार के जानकारों का कहना है कि कीमत में खुदरा बाजार में एक-दो रुपये का अंतर हो सकता है। इसका कारण माल ढुलाई में खर्च होनेवाली राशि को माना जाता है। थोक मंडी से खुदरा बाजार में पहुंचने के बाद कीमतों में अंतर हो जाता है।ड्ढr हालांकि इस मामले पर गौर किया जाये तो पता चलता है कि राजधानी में वस्तुओं की कीमतों का निर्धारण करने का कोई जरिया नहीं है। दूसर स्थानों की थोक मंडी के अनुसार ही कीमतों का निर्धारण किया जाता है, इससे यहां की दर का आकलन नहीं किया जा सकता है। नतीजा यह है कि कई सामानों की कीमत अन्य स्थानों की कीमत से ज्यादा है। कई खुदरा व्यापारी तो मौके का फायदा उठाते हैं और ग्राहकों को देख कर दर तय करते हैं। अधिकांश ग्राहक सामानों की दर एमआरपी के अनुसार ही देखते हैं। एमआरपी में ही खुदरा दुकानदारों का मुनाफा छिपा रहता है।ड्ढr कई दुकानदार कम मार्जिन पर सामान ग्राहकों को बेच देते हैं, तो कुछ खुदरा दुकानदार अधिक से अधिक मार्जिन लेना चाहते हैं। नतीजा होता है कि अलग-अलग इलाके में सामानों की दर में अंतर आ जाता है। राजधानी में भी कई सामानों की दर में इलाके के अनुसार अंतर है। सामानअपर बाजार मेंलालपुर, कांटाटोलीड्ढr सामान की कीमतमें सामान की कीमतड्ढr चावल14 से 22 रु.15 से 25 रु.ड्ढr आटा15 रुपये15 रुपयेड्ढr सरसों तेल75 रु. लीटर76 से 78 रु.ड्ढr चना दाल36 रुपये36 से 38 रु.ड्ढr मूंग दाल36 रुपये37 रुपयेड्ढr चीनी18 रुपये18 रुपये

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