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चाानवर काहै,अब तो मनई भी मरिहैं

भाजपा और बसपा के नेता जिस रारी नदी पर पुल बनवाने के वादे पर अपनी चुनावी नैया खेते रहे, आज वही रारी सूख गई। पुल तो नहीं बन पाया पर मानो नदी पार करने में हजारों ग्रामीणों को होने वाली दिक्कतों को देखकर ‘भगवान’ ने ही रारी की ‘रार’ को खत्म कर दिया। यहाँ तक कि साइकिल व दोपहिया वाहन वालों ने भी बिना पानी की रारी नदी में रास्ते बना लिए हैं। टेंड़वा गाँव के निकट स्थित पशुआघाट के दूसरी तरफ लगभग 200 गाँवों के लोग अब बिना पुल रारी नदी पार कर रहे हैं। इसके उलट रारी के सूखने से मवई, बनीकोडर, सिद्धौर और हरख ब्लॉक के 200 गाँवों के करीब चार लाख ग्रामीणों की जीवनधारा ही समाप्त हो गई है। रारी के पानी से सिंचाई करने वाले किसानों की फसल सूख गई है। नदी के पानी से कपड़े धोने वाले तमाम धोबी नदी सूखने से भुखमरी की कगार पर पहुँच गए हैं। जानवरों के सामने पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है। बाजपुर के 65 वर्षीय महिपत ने अपनी जिन्दगी में रारी की यह हालत पहली बार देखी है। गुस्से में वह कहते हैं कि ‘जानवरै काहे अब तौ मनई भी मरिहैं।’ड्ढr हरख ब्लॉक के दौलतपुर गाँव के पास से निकली रारी नदी टेढ़ी-मेढ़ी घुमावदार स्थिति में उत्तर दिशा की ओर बहते हुए मवई ब्लॉक के अशरफपुर गाँव के पास एक अन्य नदी कल्याणी में समाहित हो जाती है। रास्ते में तमाम नालों, नहर का अतिरिक्त पानी समेटकर इसका रूप काफी वृहद हो जाता है। बीच में कई जंगलों से होकर गुजरने वाली 50 किमी लम्बी रारी नदी सदियों पुरानी मानी जाती है। वन्यजीव भी इस नदी के पानी से अपनी प्यास बुझाते रहे हैं। रारी पर पुल की कमी के कारण 200 से ज्यादा गाँव की आबादी एक दूसरे से अलग-थलग सी हो जाती थी। पिछले दिनों पुल निर्माण को लेकर भाजपा व बसपा तब आमने-सामने आ गए जब सिद्धौर के टेंड़वा गाँव के पास रारी नदी के पशुआघाट पर एक ही दिन बसपा विधायक धर्मी रावत व भाजपा एमएलसी राम नरेश रावत ने पुल का शिलान्यास कर पुल बनवाने की होड़ पैदा कर दी थी। ग्रामीण खुश थे कि पुल बनेगा, मगर शिलान्यास के पत्थर लगे रहे। पत्थर लगे भी चार माह बीत गए, लेकिन कोई झाँकने तक नहीं पहुँचा।

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  • Web Title: चाानवर काहै,अब तो मनई भी मरिहैं