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उ. बिहार में मिजिल्स व चिकेन पॉक्स का कहर

मौसम परिवर्तन के साथ उत्तर बिहार में मिजिल्स और चिकेन पॉक्स ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। दोनों के प्रकोप से सरकारी और निजी चिकित्सकों की नींद हराम है। हर रो एसकेएमसीएच, जिलों के सदरअस्पताल, पीएचसी एवं निजी नर्सिग होमों में इससे डॉक्टरों ने ने बताया कि गांव में बीमारी को लेकर प्रचलित मान्यता के कारण अब तक दर्जनों बच्चों की मौत हो चुकी है।ड्ढr ड्ढr मैया जी के संबोधन से पुकार जानेवाली इस बीमारी के प्रति भ्रांति चिकित्सा जगत के लिए चुनौती है । मोटे तैार पर इस बीमारी से प्रभावित हर दस में से तीन बच्चों की मौत हो जा रही है। प्रमंडलीय स्वास्थ्य क्षेत्रीय उपनिदेशक डॉ. नारायण पंडित ने बताया कि दोनों को रोकने की दिशा में आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। जल्द ही जिलों से इस बार में रिपोर्ट ली जाएगी और प्रभावी कदम उठाये जाएंगे। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में मिजिल्स के टीके उपलब्ध है। प्रभावित जिलों को चिह्न्ति कर टीकाकरण कै म्प लगाया जाएगा। इधर, इंडियन एकेडमी आफ पेडीएट्रिक्स के बिहार के उपाध्यक्ष और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण शाह ने बताया कि बच्चों को समय पर टीका नहीं दिलाने और बीमार पड़ने पर तुरंत इलाज नहीं होने से स्थिति बिगड़ रही है।ड्ढr ड्ढr सभी सरकारी अस्पताल एवं स्वास्थ्य केन्द्रों में टीका एवं दवाइयां उपलब्ध है। बावजूद इसके पुरानी मान्यता को लेकर गांव के लोग अस्पताल नहीं जा रहे। उन्होंने बताया कि प्रभावित बच्चों का समय पर इलाज नहीं होने से निमोनिया हो जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है । डॉ. साह ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को गांवों में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। उधर, केाड़ीवाल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि हर रो दर्जनों बच्चे मिजिल्स का शिकार होकर ओपीडी में आ रहे है। इस्नमें कई की हालत नाजुक रहती है। गोर करने की बात है कि यह बीमारी एक ही परिवार के कई बच्चों में हो रही है। उन्होंने को सलाह दी कि पीड़ित बच्चों पर नजर रखें। अगर बच्चा असहा महसूस कर तो उसको अविलंब नजदीकी अस्पताल में दिखाएं।

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  • Web Title: उ. बिहार में मिजिल्स व चिकेन पॉक्स का कहर