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नहीं घूम रहा विकास का पहिया

रांची। झारखंड में विकास का काम नहीं हो रहा है। बजट का पैसा सरंडर हो रहा है। हर विभाग का पैसा बच रहा है। कोई सरकार बचाने में जुटा है, कोई सरकार गिराने में लगा है। इसका बहाना बनाकर सरकार चलानेवाले काम नहीं करना चाह रहे हैं।ड्ढr पंचायत चुनाव नहीं होने से राज्य को सालाना 125 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। रोगार गारंटी योजना का भी बुरा हाल है। 4,118 पंचायतों में 28,363 ग्राम सभाओं का गठन किया गया।ड्ढr रोगार के लिए 12.52 लाख लोगों का निबंधन हुआ, लेकिन 5.03 लाख लोगों ने ही रोगार मांगे। रोजगार संबंधित कार्यक्रमों का लाभ सिर्फ 11 फीसदी लोगों को मिल रहा है।ड्ढr ग्रामीण विकास की योजनाओं की राशि में सालाना डेढ़ गुणा बढ़ रही है। लेकिन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को छोड़ दें, तो अन्य मंत्रालयों से योजनाओं के तहत निर्धारित राशि का 15 फीसदी से भी कम ही मिल पाता है।ड्ढr कृषि शोध और सहकारिता विभाग, पशुपालन, मत्स्य पालन और परिवहन विभाग में ट्राइव्ब्स के विकास के लिए कोई योजना नहीं है। वित्तीय वर्ष 2007-08 में सरकार ने विकास कार्यो के लिए 6676 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन आठ माह में 2015 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाये। महिलाओं के लिए चलायी जा रही जननी कल्याण योजना (जेएसवाइ) में भी कुछ नयापन नहीं है। ं

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