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आठ जिलों के 32 एपीएचसी एनजीओ के हवाले

सूबे के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (एपीएचसी) का संचालन करने स्वयं सेवी संगठन मैदान में उतर। इन केन्द्रों पर डाक्टर से लेकर सभी प्रकार के कर्मचारियों का झंझट अब सरकार के सिर पर नहीं रहा। यहां पर कार्यरत डॉक्टर सहित अन्य कर्मचारियों को वहां से वापस बुला लिया गया है।ड्ढr ड्ढr अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को आउटसोर्सिग के दायर में लाया जा रहा है। पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप के तहत सूबे के आठ जिलों के करीब 32 एपीएचसी को स्वयंसेवी संगठनों के हवाले कर दिया गया है। पटना जिला में दो स्वयंसेवी संगठनों को आठ एपीएचसी आवंटित किये गये हैं। राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासनिक पदाधिकारी संजय प्रियदर्शी ने बताया कि इसके लिए पूर्व में टेंडर निकाला गया था। सरकार की मंशा है कि गांवों तक प्रभावशाली स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचायी जाएं। इसके लिए पीपीपी के तहत यह प्रयोग किया गया है। एपीएचसी की सभी सुविधाएं संबंधित एजेंसी को प्रदान करनी होगी। हर एपीएचसी पर उन्हें दो एमबीबीएस डॉक्टर, तीन स्टाफ नर्स, एक किरानी और एक लैब तकनीशियन रखना होगा। उनकी सेवा शर्तें भी निर्धारित कर दी गयी हैं। एपीएचसी पर सभी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाने होंगे। हर सेंटर पर प्रति माह 55 प्रसव और 40 बंध्याकरण कराने के साथ 24 घंटे प्रसव की व्यवस्था रखनी होगी। इन सबके बदले सरकार उन्हें निर्धारित राशि देगी। निश्चेतक रखने और लक्ष्य के अनुरूप सेवा देने पर प्रोत्साहन राशि की भी व्यवस्था है। जिन जिलों में यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है उसमें पश्चिमी चम्पारण, भोजपुर, वैशाली, नवादा, कैमूर, पटना, नालंदा और सारण जिले शामिल हैं।ड्ढr इधर पटना जिला के आठ एपीएचसी में सेवाएं दी गयी है। इनमें से सिर्फ तीन एपीएचसी में ही सेवाएं शुरू होने की संभावना है। इस आलोक में इन एपीएचसी में नियुक्त चिकित्सकों को वहां से स्थानांतरित करते हुए दूसर अस्पतालों में प्रतिनियुक्त कर दिया गया।ं

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