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चीन को कड़े संदेश की जरूरत : मैक्केन

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉन मैक्केन ने कहा है कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो तिब्बत और दलाई लामा पर चीन के मौजूदा रुख में परिवर्तन आने तक बीजिंग आेलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं लेते। मैक्केन ने गुरूवार को एबीसी टेलीविजन के कार्यक्रम ‘द व्यू’ में कहा कि यह चीन के व्यवहार पर निर्भर करता है। अगर दलाई लामा के साथ बातचीत में कुछ प्रगति नहीं होती और तिब्बत में चीनी दमन जारी रहता तो मैं वहां जाने से मना कर देता। तिब्बत में प्रदर्शनकारियों के क्रूर दमन पर कई पश्चिमी देशों ने चीन की कड़ी आलोचना की है। चीन इस साल अगस्त में होने वाले आेलंपिक खेलों की मेजबानी कर रहा है और अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बीजिंग में इन खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने की संभावना है। राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार बारक आेबामा पहले ही कह चुके हैं कि अगर चीन सूडान के उपद्रवग्रस्त दारफुर में जनसंहार रोकने और तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति को सुधारने के लिए कदम नहीं उठाता है तो बुश को आेलंपिक खेलों के उद्घाटन का बहिष्कार करना चाहिए। मैक्केन से पूछा गया कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो क्या करते, उन्होंने कहा कि अगर चीन तिब्बत और दलाई लामा के बारे में जल्दी कुछ नहीं करता तो मैं उद्घाटन समारोह में नहीं जाता। कई मामलों में महाशक्ित का दर्जा रखने वाले किसी राष्ट्र से ऐसे दमनात्मक और क्रूर व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। मुझे लगता है कि चीनियों को एक कड़ा संदेश भेजने की जरूरत है।

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  • Web Title: चीन को कड़े संदेश की जरूरत : मैक्केन