class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राज्य से रोजगार की तलाश में दूसर प्रांतों में जाने वाली आदिवासी युवतियों की स्थिति काफी दयनीय होती है। ये युवतियां गरीबी के कारण ट्रैफिकिंग का शिकार होती हैं। इन्हें खरीदने वाले शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण करते हैं। जब इन युवतियों के बार में किसी एनजीओ को पता चलता है और उसे वापस झारखंड लाया जाता है तब इनको घरों में लोग रखने को तैयार नहीं होते। जो युवती पारिवारिक जुल्म के कारण घर से भाग कर रोजगार करती है, वह वापस घर जाना नहीं चाहती। ये बातें झारखंड एंटी ट्रैफिकिंग नेटवर्क द्वारा शुक्रवार को आयोजित एक सम्मेलन में उभर कर सामने आयीं।ड्ढr सेमिनार में रांची स्थित महिला प्रोबेशन सेंटर की प्रिंसिपल श्रीमती एक्का ने काफी मार्मिक बातें कहीं। सेंटर में 51 लड़कियां हैं, जिनमें कुछ पर मुकदमा चल रहा है तो कुछ असहाय हैं। कुछ दिल्ली से वापस आयी हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैफिकिंग से आदिवासियों की जनसंख्या प्रभावित हो रही है जो पहले से ही कम है। सरकार की ओर से ज्वाइंट सेकट्ररी सोशल सुभाष चंद्र सिन्हा ने आश्वस्त किया कि सरकार पीड़ित युवतियों मदद करगी। सेमिनार में रंजू, रजनी, पूनम, स्वाती, वासवी, पूर्वी पाल, किरण, मौसमी, रशमा, स्वाती मोहंती आदि ने भी विचार व्यक्त किये।दिल्ली में लगती है मंडीड्ढr रांची। दिल्ली के पंजाबीबाग, साकेत आदि क्षेत्रों में घर में काम करनेवाली लड़कियों के खरीद फरोख्त का बकायदा बाजार लगता है। इनमें पांच हाार से 10 हाार रुपये में झारखंड से भगाकर ले जायी गयीं लड़कियों की बोली लगती है।ड्ढr

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