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कहीं सीधी टक्कर तो कहीं तिकोनी

बिलग्राम विधानसभा उपचुनाव में सपा व बसपा के बीच काँटे की टक्कर हो रही है। मतदाताओं की पसंद पर नजर डाली जाए तो यहाँ के मतदाताओं ने समय-समय पर बदलाव भी किए हैं। 1से लेकर 1तक हुए चार विधानसभा चुनावों में यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। 1े विधानसभा चुनाव में यहाँ के मतदाताओं ने कांग्रेस से किनारा कर जनसंघ के शारदाभक्त सिंह को विधानसभा पहुँचाया तो 1में जनता पार्टी का दामन थामा हालाँकि जनता पार्टी के प्रत्याशी शारदाभक्त सिंह ही थे। 10 में मतदाता फिर कांग्रस के पक्ष में चले गए और हरिशंकर तिवारी को विधानसभा पहुँचाया। 1में भी कांग्रेस के हरिशंकर तिवारी विजई रहे। 1व 1े चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा के गंगाभक्त सिंह को विजयी बनाया लेकिन 1में सपा के विश्राम सिंह यादव को विधानसभा में पहुँचा दिया। 1में भाजपा के गंगा सिंह चौहान जीते पर 2002 के चुनाव में फिर विश्राम सिंह यादव को मतदाताओं ने विजयी बनाया। 2007 में मतदाताओं ने बड़ा फेरबदल करते हुए बसपा प्रत्याशी उपेन्द्र तिवारी को विधानसभा पहुँचा दिया। इस चुनाव में इन्हीं उपेन्द्र तिवारी की पत्नी रजनी तिवारी प्रत्याशी हैं।ड्ढr करनैलगंज उपचुनाव में त्रिकोणात्मक संघर्षड्ढr गोण्डा (कासं)। करनैलगंज विधानसभा उपचुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। चुनावी मुकाबला बसपा प्रत्याशी कुँवरि वृज सिंह, कांग्रेस प्रत्याशी रामा मिश्रा व सपा प्रत्याशी योगेश प्रताप सिंह के बीच दिख रहा है। भाजपा प्रत्याशी केके शुक्ल भी अंतिम चरण में मुकाबले में आने का प्रयास कर रहे हैं।ड्ढr यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक रहे अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भइया के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद हो रहा है। उन्होंने अपनी बहन कुँवरि वृज सिंह को चुनाव मैदान में बसपा प्रत्याशी के रूप में उतारा है। वैसे इस चुनाव में मतदाताओं के बीच कोई मुद्दा नहीं है। न ही लल्ला के विधानसभा से इस्तीफे को ही कारगर मुद्दे के तौर पर उनके विरोधी उछाल सके हैं इसीलिए उनके प्रत्याशी न होने के बावजूद यह चुनाव उन्हीं के इर्द-गिर्द लड़ा जा रहा है। उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस प्रत्याशी रामा मिश्रा से हो रहा है क्योंकि पिछले चुनाव में ब्राह्मण मतदाता उनके साथ मजबूती से खड़ा था लेकिन इस बार वह कांग्रेस प्रत्याशी के साथ दिखाई पड़ रहा है।

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