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हो सकती है गेहूं व दाल की तस्करी

अनाज की भंडारण सीमा तय करने से बिहार को गेहूं और दाल की तस्करी से भी जूझना पड़ सकता है। केन्द्र की सलाह पर राज्य सरकार ने पहल शुरू तो की लेकिन पड़ोसी राज्यों में ऐसी व्यवस्था नहीं होने के कारण अब उसे ठोस निर्णय से पहले कई बार सोचना पड़ेगा। यही वजह है कि राज्य सरकार अब पड़ोसी राज्यों पर भी नजर बनाये हुए है। केन्द्र की वर्तमान सलाह के साथ एक पुराने आदेश ने भी खुले बाजार की नीति के बीच भंडारण सीमा का फामरूला बनाने को लेकर राज्य सरकार को परशानी में डाल रखा है।ड्ढr ड्ढr फिलहाल महाराष्ट्र, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल में स्टॉक सीमा आदेश लागू है। गुजरात में दालों के भंडारण को लेकर प्रयास आरंभ हो गया है। महाराष्ट्र के आसपास के राज्यों में भी एक समान व्यवस्था हो गयी है लेकिन बिहार में स्थिति एकदम उलट है। पश्चिम बंगाल को छोड़कर उत्तर प्रदेश, झारखण्ड और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में खाद्यान्न पर खुले बाजार की नीति ही लागू है। ऐसे में अगर बिहार ने अकेले स्टॉक सीमा आदेश लागू करने की कोशिश की तो गेहूं और दाल पड़ोस के राज्यों की मंडियों में पहुंचने लगेगा। इससे महंगाई पर काबू पाने से कहीं अधिक राज्य में अनाज का कृत्रिम संकट पैदा होगा। साथ ही बिचौलियों, अनाज तस्करों और मुनाफाखोरों की चांदी हो जायेगी। स्टॉक सीमा आदेश लागू करने संबंधी केन्द्र सरकार की सलाह पर मुख्यमंत्री श्री कुमार ने भी विचार करने की तो इच्छा जतायी लेकिन राज्य सरकार के लिए केन्द्र का एक पुराना आदेश खासा मुश्किल पैदा कर रहा है। दरअसल 2006 में केन्द्रीय कृषि एवं खाद्य मंत्री शरद पवार ने राज्य के भीतर और दो राज्यों के बीच तमाम कारोबारी बाधाओं को समाप्त करने का आदेश दिया था। नरेगा में परिवारों को औसत काम नहीं मिलने पर सरकार सख्तड्ढr पटना(हि.ब्यू.)। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत परिवारों को औसत काम भी नहीं मिल पा रहा। कहां प्रति परिवार को सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराना था जबकि यह आंकड़ा 30 फीसदी के पार भी नहीं पहुंच पा रहा। योजना के उद्देश्यों पर पानी फिरता देख सरकार ने अब फिसड्डी जिलों के उप विकास आयुक्तों से स्पष्टीकरण पूछने का निर्णय लिया है। उन्हें यह बताना होगा कि आखिर उनके जिलों में परिवारों को तय मानक के अनुसार श्रम दिवस उपलब्ध क्यों नहीं कराया जा रहा। पिछले दिनों राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की प्रगति की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अधिसंख्य जिलों में अधिकतर परिवारों को 30 से भी कम श्रम दिवस उपलब्ध कराया गया है। कई जिलों में तो स्थिति और भी खराब है। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि खगड़िया में प्रति परिवार 2.17 श्रम दिवस, शेखपुरा में 2.27, अरवल में 4.75, बांका में 5.74, पूर्णिया में 6.48, किशनगंज में 6.62, भभुआ में 7.सीतामढ़ी में 8.2 तथा बेगूसराय में 8.श्रम दिवस ही उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग ने प्रगति को योजना के उद्देश्यों के प्रतिकूल बताया है। ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अनूप मुखर्जी ने सभी उप विकास आयुक्तों को यह हिदायत दी है कि योजना के लक्ष्य के तहत प्रति परिवार 100 श्रम दिवस का रोजगार उपलब्ध कराने के लक्ष्य को पूरा करं। तटबंधों की मरम्मत नरगा के तहत होड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि तटबंधों की मरम्मत से संबंधित काम नरगा के तहत कराए जाएं। इससे एक तरफ तो नरगा के तहत मजदूरों को नियमित काम मिलता रहेगा और दूसरी तरफ तटबंधों की नियमित मरम्मत भी होती रहेगी। साथ ही बिहार में नरगा की सफलता भी बढ़ेगी और किसानों की समस्या का समाधान भी होगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा है कि तटबंधों से जुड़े मिट्टी के काम होते हैं लिहाजा इन्हें नरगा के तहत कराने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार नदियों की उड़ाही और चौरों से जलनिकासी के काम भी मिट्टी के काम से जुड़े हुए हैं। मंत्रालय की योजना है कि इन सभी कार्यो को नरगा के तहत कराया जाए और इसकी एजेंसी जल संसाधन विभाग रहे। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मसले को लेकर 7 अप्रैल को केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह और राज्य के जल संसाधन मंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह के बीच बैठक भी होने वाली थी लेकिन दोनों मंत्रियों की व्यस्तता के कारण यह बैठक नहीं हो सकी। जल्द ही बैठक की अगली तिथि निर्धारित होने वाली है।ं

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