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भारतीय सेना में महिला अफसरों का टोटा

रक्षा मंत्री ए के एंटोनी के सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को बढ़ावा देने के प्रयासों को करारा झटका लगा है। सेना की आफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी चेन्नई में इस बार महिला अधिकारियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 80 तक कर दी गई थी लेकिन एक अप्रैल से शुरू हुए सत्र में 40 से भी कम महिलाएं चुनीं जा सकीं। इस तरह उनके लिए तय की गईं आधी से अधिक सीटें खाली चलीं गई हैं।ड्ढr ड्ढr इस बार का सत्र महिला कैडेटों के लिए ऐतिहासिक था क्योंकि महिलाओं के प्रशिक्षण की अवधि इस बार पुरुष शार्ट सर्विस कमिशन अधिकारियों के बराबर करते हुए 4सप्ताह की गई थी। इतना ही नहीं इस सत्र से पहली बार महिला अधिकारियों को प्रशासनिक प्रशिक्षण से आगे बढ़कर पलाटून कम्पनी कमांडर का प्रशिक्षण भी दिया जाना था। सैन्य सूत्रों ने कहा कि इससे साफ जाहिर है कि सुयोग्य महिलाएं देश की सेना की ओर आकर्षित नहीं हो रही हैं और पुरुष युवाओं की तरहही युवतियों का रूझान भी कार्पोरेट जगत की नौकरियों की ओर है। भारत के सशस्त्र बलों में इस समय 5137 महिला अधिकारी हैं।ड्ढr ड्ढr इनमें से सेना में 4101, वायु सेना में 784 और नौसेना में 252 महिला अधिकारी हैं। महिलाओं को सेना की मेडिकल कोर, डेंटल कोर तथा वायु सेना एवं नौसेना में उनके बराबरी के स्तर पर स्थायी कमिशन दिया जाता है। वायु सेना में महिलाओं को लड़ाकू पायलट को छोड़ कर बाकी सभी विभागों में शामिल किया जा रहा है। नौसेना महिला अधिकारियों की भर्ती तो करती है लेकिन उन्हें विदेश जाने वाले युद्धपोतों या पनडुब्बियों में तैनात नहीं किया जाता। रक्षा मंत्री ने पिछले महीने संसद को आश्वस्त किया था कि वह महिलाओं को स्थायी कमिशन पर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक ढंग से विचार विमर्श करेंगे लेकिन एकेडमी के मौजूदा सत्र की शुरुआत घोर निराशाजनक ढंग से हुई है। सेना के सूत्रों ने कहा कि महिलाओं को जंग के मोर्चे पर भेजने की मांग की जाती रही है लेकिन पहली चुनौती तो उन्हें फौज की ओर आकर्षित करना बन गया है।

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