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स्कूल भवनों का निर्माण मॉनीटरिंग का जिम्मा शिक्षा समितियों को

राज्य के प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में वर्ष 2008-0में बनने वाले 18,000 कमरों के जल्द और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के लिए मॉनीटरिंग का जिम्मा विद्यालय शिक्षा समितियों को दिया गया है। समितियां इसके लिए अपने आस-पास के बेरोजगार डिप्लोमा इंजीनयरों को तकनीकी पर्यवेक्षक के रूप में बहाल करंगी और उनको निश्चित राशि का भुगतान करंगी। इसके साथ ही राज्य की अधिक उम्र की मुस्लिम बालिकाओं के लिए सरकार पहली बार सभी जिलों में रोजगारपरक शिक्षा शुरू करने जा रही है।ड्ढr ड्ढr इसके लिए बीईपी ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से तालमेल किया है। योजना को फिलहाल सीमांचल के 7 जिलों में फोकस किया जा रहा है। इस बार में निर्णय सर्वशिक्षा अभियान समेत विभिन्न मुद्दों पर विचार के लिए शुक्रवार को बुलाई गई बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की बैठक में लिया गया। इसकी अध्यक्षता परिषद के राज्य परियोजना निदेशक राजेश भूषण ने की। बैठक में परिषद के अपर निदेशक राजेश थडानी, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक (बिहार-झारखंड) संजय कुमार सिन्हा, सभी जिला शिक्षा अधीक्षकों (डीएसई), क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडीई) और परियोजना के कार्यक्रम पदाधिकारियों ने भाग लिया।ड्ढr ड्ढr श्री भूषण ने बताया कि सरकारी विभागों में कार्यरत जूनियर इंजीनयरों और अन्य अभियंताओं को गांवों के स्कूलों में चल रहे निर्माण कार्य को देखने का कम ही समय मिल पाता था। इसीलिए यह विशेष व्यवस्था की गई है। डीएसई को समय पर कमरों के निर्माण का काम शुरू कराने और समन्वय का दायित्व दिया गया है। साथ ही अब कमरों के निर्माण पर विद्यालय शिक्षा समितियों की ही निगरानी रहेगी। वहीं पर्यवेक्षक के रूप में गांव के ही युवकों के रहने से काम बेहतर हो सकेगा। हर 10 योजना पर एक पर्यवेक्षक होगा। ये युवक स्कूलों में बनने वाले कमरों की गुणवत्ता, डिजायन और इंजीनियरिंग के विभिन्न पहलुओं पर नजर रखेंगे। दिन भर चली बैठक में स्कूल से बाहर रह रहे 10 लाख बच्चों को स्कूल से जोड़ने पर भी विमर्श हुआ। खासकर मुसहर और अधिक उम्र की मुस्लिम बालिकाओं के लिए उनके घरों के पास ही स्कूल खोले जाने का निर्णय लिया गया। श्री भूषण ने बताया कि दोनों निर्णयों के बार में सभी डीएम को निर्देश जारी कर दिया गया है। बताया गया कि सीमांचल के जिलों में चलाए जा रहे व्यावसायिक शिक्षा के आधा दर्जन पाठय़क्रमों में नामांकन के लिए 17 हजार मुस्लिम बालिकाओं ने आवेदन किया है। सर्वशिक्षा अभियान के तहत बिहार के लिए केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत 3223 करोड़ रुपए को खर्च करने को लेकर कार्ययोजना तैयार करने के लिए 3-4 मई को बोधगया में डीएसई की कार्यशाला बुलाई गई है।

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