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तालिबान हमले में दो भारतीयों की मौत

अफगानिस्तान में भारतीय सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा जरांज-देलारम राजमार्ग पर तालिबान लड़ाकों ने भारतीय कर्मचारियों पर हमला कर दो कर्मचारियो को मार डाला। हमले में पांच कर्मी घायल हो गए। शनिवार को यह हमला सवेरघ् नौ बजे निमरो प्रांत में मिनार के पास हुआ। मृतकों के नाम एम.पी. सिंह और सी. गोविंदास्वामी हैं। बिश्राम ओरांव, विक्रम सिंह, मुहम्मद नजीन खान, अनिल कुमार थंपी और मायाराम घायल हुए। घायलों को निमरो के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक घायल स्थानीय अफगानी है। मृतकों के शव और घायलों को भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है। तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है। रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने कर्मचारियों के परिानों को तुरंत राहत सहायता देने के निर्देश दिए। भारत ने हमले की निंदा की : हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में अपना योगदान जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। भारत इस काम के लिए 75 करोड़ डालर की मदद दे रहा है। राजमार्ग का महत्व : जरांज-देलाराम राजमार्ग अफगानिस्तान को ईरान से जोड़गा। इससे भारत व अफगानिस्तान के बीच आड़ बने पाकिस्तान को टाल कर व्यापार बढ़ाया जा सकेगा। करीब ढाई सौ कि.मी. लंबे इस रास्ते को बनाने में बीआरओ के करीब 400 कर्मचारी जुटे हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए अफगानी बलों के अलावा आईटीबीपी के 70 जवान भी तैनात हैं। कई हमले हो चुके : तालिबानी 2003 से ही भारतीयों को अपना निशाना बना रहे हैं। जबुल में एक परियोजना पर काम कर रहे दो इंजीनियरों का 2003 में अपहरण किया लेकिन बाद में छोड़ दिया। उसी वर्ष अफगानिस्तान की एक टेलीकॉम कंपनी के एक इंजीनियर की हत्या कर दी गई। 2005 में जरांज-देलारम राजमार्ग पर एक ड्राइवर एम.आर. कुट्टी का अपहरण कर हत्या की गई। 2006 में भी बहरीन की एक कंपनी में कार्यरत एक भारतीय इंजीनियर को मार दिया गया।

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