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हिंसा का मारा देश

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इराक में गंभीर मानवीय संकट के हालात पैदा हो गए हैं और इस साल के आखिर तक ऐसे लोगों की संख्या करीब एक करोड़ हो जाएगी, जिन्हें मदद की जरूरत पड़ेगी। इराक में आतंकवादी संगठन आईएस और सरकारी सेना के बीच लड़ाई व हिंसा की वजह से करीब 56 लाख लोग पहले ही या तो विस्थापित हो चुके हैं या बुरी तरह प्रभावित हैं। लेकिन इस लड़ाई के रुकने के कोई आसार भी नजर नहीं आ रहे। इन हालात को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने इराक में विस्थापितों और हिंसा प्रभावित लोगों को मदद मुहैया कराने के लिए करीब 50 करोड़ डॉलर की रकम जुटाने की अपील की है।

इस रकम के जरिये लोगों को रहने के लिए जगह, खाना-पानी और रोजमर्रा में काम आने वाली अन्य चीजें मुहैया कराई जा सकेंगी। मदद की रकम में कमी होने की वजह से पहले ही 77 क्लीनिक बंद करने पड़े हैं और करीब दस लाख लोगों के खाने-पीने के सामान की मात्रा में कटौती करनी पड़ी है। इराक के लिए मानवीय सहायता कार्यों के संयोजक लीज ग्रांडे का कहना था कि अगर समय पर यह रकम नहीं जुटाई गई, तो इराक में राहत कार्यों में करीब पचास फीसदी की कटौती करनी पड़ेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुखिया डॉक्टर मार्गरेट चैन ने आगाह करते हुए कहा है कि इराक में स्वास्थ्य, पानी और साफ-सफाई मुहैया कराने वाली सेवाएं ठप होने के कगार पर हैं। जरूरी दवाओं की आपूर्ति राष्ट्रीय स्तर पर ठप हो रही है व गंदगी बढ़ने से गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बहुत बढ़ गया है।
संयुक्त राष्ट्र रेडियो वेब पोर्टल से

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