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भला अपराधियों से क्यों हैं पुलिस के दोस्ताना सम्बन्ध

नोएडा में सरआम हत्याएँ हो रही हैं। राजधानी में दिनदहाड़े बैंक लूटे जा रहे हैं। पश्चिमी उप्र में चीनी मिल के एक अफसर को दफ्तर के बाहर बुला कर गोली मार दी जाती है लेकिन अपराधी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। थानों में एफआईआर नहीं लिखी जा रही। अब तो खुद पुलिस के मुखिया को लगने लगा है कि पुलिस अपराधियों के प्रति उदार दृष्टिकोण अपना रही है।ड्ढr सूबे की कानून व्यवस्था और पुलिस की लचर कार्यशैली का खुलासा महकमे की एक ताजा रिपोर्ट से होता है। पुलिस महानिदेशक विक्रम सिंह ने नई सरकार के गठन के बाद बीती फरवरी तक राज्य में हुई प्रमुख आपराधिक घटनाओं और उनसे जुड़े अपराधियों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की। समीक्षा सिर्फ गंभीर किस्म के अपराधों की गई जिनमें दो या दो से अधिक व्यक्तियों की हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, सरकारी कर्मचारियों पर हमले, दिन में घर में घुस कर लूट व डकैती, बम फेंक कर हत्या या घायल करने की घटनाएँ शामिल हैं।ड्ढr समीक्षा में पाया गया कि इन मामलों में केवल दो फीसदी अभियुक्तों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून रासुका तामील हुआ। जबकि केवल 8 फीसदी मुलजिमों के खिलाफ समाज विरोधी क्रियाकलाप एवं गिरोहबंद एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। इन आँकड़ों को देखकर खुद डीाीपी का आकलन है कि ‘शातिर अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में उदार दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।’ड्ढr मुख्यमंत्री मायावती के साफ निर्देश हैं कि थानों पर शत प्रतिशत मामलों में एफआईआर दर्ज की जाए। लेकिन थानों पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही। पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर प्रदेश भर में टेस्ट एफआईआर दर्ज कराने का अभियान चलाया गया। इसके पीछे मकसद पवित्र था। लेकिन इसके नतीजे भी चौंकाने वाले निकले। वाराणसी पुलिस महानिरीक्षक ने वाराणसी, चंदौली और जौनपुर के 13 थानों में टेस्ट एफआईआर के लिए अपने आदमी भेजे। इनमें 7 थानों पर एफआईआर नहीं लिखी गई। एक थाने पर पर टेस्ट एफआईआर लिखने गए वादी को ही थानाध्यक्ष और सिपाहियों ने पीट दिया। यह मामला उछला तो थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया। लेकिन अन्य जिन थानों पर टेस्ट एफआईआर नहीं दर्ज की गई वहाँ अधिकांश जिम्मेदार पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं की गई।ड्ढr सूचना के अधिकार के तहत टास्क फोर्स के प्रभारी शैलेन्द्र सिंह ने बीती दस अप्रैल को वाराणसी के एसएसपी के दफ्तर में फाइलों का परीक्षण किया तो पाया कि मिर्जा मुराद और चौबेपुर थाने में वही एसओ काम कर रहे हैं जिन्होंने टेस्ट एफआईआर तक को नजरअंदाज किया था। रोहनिया थाने का एसओ हटा दिया गया लेकिन उसके लिए केवल लघुदण्ड की सजा प्रस्तावित की गई।

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  • Web Title: भला अपराधियों से क्यों हैं पुलिस के दोस्ताना सम्बन्ध