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खबरें कोयला जगत की

ोल इंडिया करगा 413.8 एमटी उत्पादनड्ढr चालू वित्तीय वर्ष 2008-0में कोल इंडिया ने 413.80 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है। यह पिछले वर्ष से 34.3 एमटी अधिक है। सर्वाधिक उत्पादन लक्ष्य एमसीएल और एसइसीएल को दिया गया है। सबसे कम लक्ष्य एनइसी को दिया गया है। पिछले साल टारगेट नहीं पा सकने वाली कंपनियों को कम उत्पादन करने को कहा गया है। इस वर्ष के लिए कोल इंडिया ने पहले करीब 400 एमटी उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किया था। बताया जाता है कि कोयला मंत्रालय के निर्देश पर इसे रिवाक्ष किया गया। देश में कोयले की बढ़ी मांग के मद्देनजर यह कदम उठाया गया। अधिकारियों को उम्मीद है कि कंपनियां लक्ष्य पा सकेंगी। पिछले साल कंपनी ने 37एमटी कोयले का उत्पादन किया था। क्षमता के मुताबिक कंपनियों का लक्ष्य बढ़ाया और घटाया गया है। इसीएल को पिछले वर्ष की तुलना में करीब दो एमटी कम उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया है। गत वर्ष कंपनी को 33.41 एमटी उत्पादन का लक्ष्य दिया गया था। हालांकि वह 24.06 एमटी उत्पादन ही कर सकी थी। एनइसी भी लक्ष्य 2.0 की जगह 1.10 एमटी उत्पादन कर पायी थी।ड्ढr श्रमिक नेताओं की नीयत ठीक नहीं : बाबूलालड्ढr रांची (सं)। द झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि श्रमिक नेताओं की नीयत कामगारों के प्रति ठीक नहीं है। यही कारण है कि प्रबंधन बेसिक और डीए पर 15 फीसदी अंतरिम राहत देने को तैयार था। इसके बाद भी संगठन मात्र बेसिक के आधार पर आइआर लेने पर सहमत हो गये। कामगारों को यह बात समझनी होगी। उनकी इस हरकत का जवाब एकाुट होकर देना होगा। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में दो बाजार व्यवस्था नहीं है। कामगार और अधिकारियों के लिए सब कुछ एक ही है। ऐसी स्थिति में वेतन में काफी अंतर होने से कामगारों की स्थिति बद से बदतर होती जायेगी। अंतरिम राहत के आसपास ही वेतन समझौता फाइनल कर लिये जाने की परिपाटी रही है। सातवें वेतन समझौते में यह हो चुका है। वर्तमान स्थिति के मद्देनजर कम से कम 40 फीसदी आइआर देने या उसकी जगह 40 से 80 हाार एडहॉक पेमेंट करने की मांग की। साथ ही अधिकारियों की तरह सुविधाएं देने की बात भी कही।ड्ढr विदेश में खदान लेने का प्रयास तेजड्ढr रांची। कोल विदेश के तहत विदेशों में कोकिंग कोल की खदान लेने का प्रयास तेज हो गया है। मुजांबिक, इंडोनेशिया सहित अन्य देशों में इसकी तलाश की जा रही है। इस मामले में पांच कंपनी एक साथ काम कर रही हैं। इसमें कोल इंडिया भी शामिल है। वहां खदान खरीद कर देश में कोकिंग कोल की जरूरत को पूरा करने का प्रयास किया जायेगा। अभी काफी मात्रा में कोकिंग कोल विदेशों से आयात किया जा रहा है। उधर, कोल इंडिया प्रबंधन निजी कंपनियों में जा रहे कंपनी के टैलेंट को रोकने के लिए रिटेंशन स्कीम बनाने पर भी विचार कर रहा है। प्रोमोशन के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की बात भी चल रही है।ड्ढr गेल के साथ काम करगा कोल इंडिया प्रबंधनड्ढr रांची। कोल गैसीफिकेशन के मामले में कोल इंडिया प्रबंधन गेल के साथ मिलकर काम करगा। काफी गहराई में स्थित कोयले को गैस और लिक्िवड से माध्यम से निकाला जाता है। दोनों बिंदुओं पर काम चल रहा है। एनसीएल और एनइसी में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है। सीएमडी एके सिंह के मुताबिक इस योजना में सीएमपीडीआइ भी अपने स्तर से सहयोग कर रही है।

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