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वलुप्त होती मछली के संरक्षण पर जोर

वेटनरी कॉलेज में मछुआरा केंद्रित मत्स्य संसाधन प्रबंधन विषयक सेमिनार शनिवार को समाप्त हो गया। विशेषज्ञों ने झारखंड में विलुप्त होती मछली की प्रजाति पर चर्चा की। साथ ही इसके संरक्षण पर जोर दिया। इसमें उभर बिंदुओं को लागू करने के लिए पुन: चर्चा कर वे रोड मैप बनायेंगे। उसे केंद्र एवं राज्य सरकार को सौंपेंगे।ड्ढr समन्वयक डॉ एके सिंह ने बताया कि सेमिनार में छह तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। सरकारी योजनाओं को मछुआरों तक पहुंचाने के लिए इसका स्थानीय भाषा में अनुवाद करने पर जोर दिया गया। योजना लागू करने, इसके तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ निर्णय लेने में भागीदारी बनाने को कहा। इसके लिए उन्हें प्रेरित करने और प्रशिक्षण देने की जरूरत बतायी। देश में उपलब्ध जल संसाधन के अधिकतम उपयोग के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार को जिम्मेवारी निभाने, मछुआरों की समस्या पर ध्यान देने के लिए राज्य स्तर पर शिकायत सेल बनाने पर बल दिया गया।ड्ढr मत्स्य योजना में महिलाओं को भागीदार बनाने के लिए को-ऑपरटिव गठित करने का सुझाव दिया गया। मछली पालन को कृषि के बराबर का दर्जा देने, योजना लागू करने में एनजीओ को भागीदार बनाने, मछली पालन संबंधी किताबों को कम कीमत पर उपलब्ध कराने और छोटी मछलियों के उत्पादन पर भी बल दिया गया। समापन समारोह में निदेशक डॉ भास, पूर्व डीडीाी पीबी देहादराय, सीएस सिंह, राजीव कुमार, एससी मुखर्जी और एके सिन्हा मौजूद थे।

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  • Web Title: वलुप्त होती मछली के संरक्षण पर जोर