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विकेंद्रीकरण के बिना विकास नहीं : मेधा

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा है कि ग्राम और वार्ड स्तर की इकाइयों को ज्यादा अधिकार दिये जाने चाहिए। इस स्तर पर होनेवाला विकास ही असली विकास है। संविधान में भी विकास और नियोजन का अधिकार विकेंद्रित इकाइयों को देने की बात कही गयी है, जबकि एसा हो नहीं पा रहा है।ड्ढr सुश्री पाटकर शनिवार को यहां कांटा टोली स्थित वाइएमसीए सभागार में ‘झारखंड में वैकल्पिक विकास की संभावना और प्रयास’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के उद्घाटन के बाद बोल रही थीं। इसका आयोजन झारखंड अल्टरनेटिव डेवलपमेंट फोरम ने किया है। उन्होंने वर्षो से एक स्थान पर रह रहे लोगों को उााड़ कर उद्योग लगाने पर नाराजगी जतायी। विस्थापन को अभिशाप बताते हुए कहा कि विकास की यह कैसी धारणा है कि लोगों को घर भी नहीं मिले। उन्होंने कहा कि खेती खत्म नहीं होनी चाहिए और रोजगार मूलक उद्योग ही स्थापित होने चाहिए। इस अवसर पर उपस्थित दिल्ली के डाक्टर असीम श्रीवास्तव ने अपने की-नोट संबोधन में कहा कि हमें वैकल्पिक विकास के बजाय विकास का विकल्प ढूंढना है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध मानवशास्त्री डाक्टर रामदयाल मुंडा ने कहा कि ऐसी गोष्ठियों से सकारात्मक रास्ता निकालेगा। प्रारंभ में एक्सआइएसएस के डायरक्टर डाक्टर एलेक्स एक्का ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि विकास की वर्तमान प्रक्रिया गरीबों और प्रकृति के खिलाफ रही है। झारखंड के उद्यमी विकास सिंह की अध्यक्षता में आयोजित द्वितीय सत्र में जेएनयू (दिल्ली) के डाक्टर अरुण कुमार, आईआईटी दिल्ली के सिविल इांीनियर योगेश्वर कुमार एवं कानपुर के डाक्टर राहुल वम्र्मन ने ‘वैकल्पिक विकास की अवधारणा’ विषय पर व्याख्यान दिये। सेमिनार रविवार को भी जारी रहेगा।ड्ढr हर रंग वाली खतरनाक कुर्सियां : सेमिनार में शनिवार को उद्घाटन सत्र में श्रोताओं के लिए हर रंग वाली कुर्सियां बड़ी खतरनाक साबित हुईं। अब क्या जाने कुर्सियों के पांव कमजोर थे या उन पर बैठे लोग कि कई कोने में कुर्सियों पर बैठे लोग अचानक कुर्सियों सहित धराशायी हो जा रहे थे। गिरने वाले बेचार प्रबुद्ध लोग थोड़ा शर्माते उठने का प्रयास करते कि बगल के लोग दौड़ पड़ते। गिरने-पड़ने का यह दृश्य बार-बार सेमिनार हाल में देखा गया।ड्ढr नेत्रहीन छात्राओं ने गाये स्वागत गीत : सेमिनार में ब्रजकिशोर नेत्रहीन बालिका विद्यालय की छात्राएं-संगीता मिंज, रीना शर्मा,उर्मिला कुमारी, रानी, अनु और मनोनीत ने शिक्षिका मंगला प्रसाद के नेतृत्व में सुमधुर स्वागत गान प्रस्तुत किया।ं

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