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शिक्षक-स्नातक निर्वाचन:मतदान में गड़बड़ी रोकने को नियम कड़े किए गए

बिहार विधान परिषद के लिए शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के दौरान गड़बड़ी रोकने के लिए चुनाव आयोग ने नियम और कड़े कर दिये हैं।पहली बार इस चुनाव में मतदाताओं की सही पहचान के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों को अनिवार्य किया गया है। इसके तहत वैसे मतदाता जिनके पास फोटो पहचान पत्र नहीं हैं उन्हें वोट देने के लिए सात वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक से अपनी पहचान साबित करनी होगी। मतदान 28 अप्रैल को होगा। आयोग के सूत्रों के अनुसार मतदाता फोटो पहचान पत्र नहीं होने की सूरत में पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, शिक्षण संस्थाओं द्वारा कर्मचारियों को जारी पहचान पत्र, विश्वविद्यालयों द्वारा डिग्री और डिप्लोमा का मूल प्रमाण पत्र, सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र की मूल प्रति, राज्य और केन्द्र सरकार, निगम-बोर्ड, स्थानीय निकाय और पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को निर्गत पहचान पतड्र्ढr मान्य होंगे।ड्ढr ड्ढr आयोग के सूत्रों के अनुसार पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 70,और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 7,473, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 60,547 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 5,853, दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 30 तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 6712 तथा कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 76,है। काम में फिसड्डी तो सीआर भी वैसी हीड्ढr पटना(हि.ब्यू.)। अच्छा काम और बेहतर कॅरियर। काम में फिसड्डी तो सीआर भी वैसी ही लिखी जाएगी। 28 और 2अप्रैल को यह तय हो जाएगा कि अधिकारियों का भविष्य कैसा होगा। योजनाओं के कार्यान्वयन में बरती जा रही ढिलाई को कसने के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने यह नया फंडा अपनाया है। विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की समीक्षा होगी। किस अधिकारी के नेतृत्व में कितना काम हुआ। अब यह देखा जाएगा। उसी आधार पर सीआर में टिप्पणी भी लिखी जाएगी। बैठक में उप विकास आयुक्तों के अलावा योजनाओं से जुड़े अन्य पदाधिकारी भी शामिल होंगे।ड्ढr ड्ढr पिछले दिनों ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के दौरान यह तस्वीर उभर कर आई कि अपवाद के तौर पर भी एक जिला ऐसा नहीं हैं जहां सब कुछ ठीक-ठाक हो। मामला चाहे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जॉब कार्ड देने का हो, रोजगार उपलब्ध कराने का हो या फिर एसजीएसवाई के तहत स्वयं सहायता समूहों के गठन, उन्हें ऋण उपलब्ध कराने या फिर इंदिरा आवास से जुड़ा मामला रहा हो। प्रगति संतोषजनक नहीं रही है। ग्रामीण विकास विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। विभाग की परशानी इस बात से भी है कि बार-बार निर्देश देने और चिठ्ठी लिखने के बावजूद अधिकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में दिलचस्पी नहीं दिखाते। अंतत: विभाग ने स्क्रू टाइट करने का नया फंडा निकाला है और अब उपलब्धि के आधार पर ही संबंधित अधिकारियों की वार्षिक चारित्री (सीआर) में टिप्पणी लिखी जाएगी।

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  • Web Title: शिक्षक-स्नातक निर्वाचन:मतदान में गड़बड़ी रोकने को नियम कड़े किए गए