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आजादी में जमीयत की भूमिका स्मरणीय: अरशद

देश की आजादी में जमीयत उलेमा की भूमिका स्मरणीय है। जमीयत देश का सबसे पुराना मुस्लिम संगठन होने के साथ-साथ गैर-राजनीतिक है। मुल्क को आजाद कराने में उलेमाओं ने भारी तादाद में कुर्बानी दी है। जमीयत-ए- उलेमा-ए- हिन्द के सदर सैयद हारत मौलाना अरशद मदनी ने शनिवार को हा भवन में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में ये बातें कहीं।ड्ढr ड्ढr बिहार व झारखंड के कोने -कोने से आए हाारों की संख्या में जमीयत से जुड़े लोगों की मौजूदगी में इन दोनों सूबे के आधा दर्जन पदाधिकारियों को सर्वसम्मति से चुना गया। मौलाना मदनी ने मौजूद लोगों की मर्जी के बाद कारी मुईनउद्दीन (गया) को बिहार व झारखंड का सदर होने की घोषणा की । बिहार में नाएब सदर के रूप में कमरुल हसन (भागलपुर) तथा मौलाना अनवार (किशनगंज) को चुना गया। वहीं दूसरी तरफ झारखंड के लिए नाएब सदर मौलाना इब्राहिम (धनबाद) व मौलाना शहाबउद्दीन (हाारीबाग) के नाम पर लोगों ने मुहर लगा दी। इन दोनों सूबों के लिए खजांची के रूप में हाजी बेलाल (पटना) को चुना गया। इस दौरान कई प्रस्ताव भी पारित हुए जिसमें आतंकवाद के खिलाफ लड़ने पर एक सम्मेलन आयोजित करने की बात सामने आई।ड्ढr ड्ढr मौलाना मदनी ने कहा कि देश तथा विदेश में जो बदअमनी, आतंकवाद तथा लोगों के बीच भेद-भाव का माहौल है, इसके लिए अमेरिका तथा क्षरायल जिम्मेदार है। मौलाना ने कहा कि देश का संविधान लोकतंत्र पर आधारित है। लोकतंत्र की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ताकत एटम बम की ताकत से कई गुणा अधिक है। राज्यस्तरीय चुनाव व सम्मेलन को लेकर हा भवन में सुबह से ही चहल-पहल दिखी। इस अवसर पर बिहार व झारखंड के महासचिव हाजी हुस्न अहमद कादरी, मशहूद नदवी, कौस सिद्दीकी, अनवारुल होदा, अखलाक अहमद सहित बहार व झारखंड से आए हाारों लोग मौजूद थे।

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