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मोटेरा का हिसाब ग्रीन पार्क पर बराबर

किसको क्या मिला यह मुकद्दर की बात है! ग्रीन पार्क के ड्रेसिंग रूम में बैठे अनिल कुम्बले की आँखें सुबह से ही मैदान पर लगी थीं। दक्षिण अफीका की दूसरी पारी के हर विकेट के पतन पर उनकी आँखें चमक उठती थीं, क्योंकि जो काम पाँच दिनों का था, उनके साथी सिर्फ तीन दिनों में ही निपटाए दे रहे थे। फिर भी जीत का सेहरा तो माही के सिर ही बँधना था। जीत भी ऐसी जिसने पिछड़ती टीम को सीरीा में बराबरी का गौरव दिलाया। कप्तान कुम्बले ने ग्रीम स्मिथ के साथ फ्यूचर कप तो शेयर किया लेकिन उनके चेहर से इस बात की निराशा भी झलक रही थी कि वह जीत के पलों का हिस्सा बनने के लिए मैदान पर नहीं थे। भारत ने अहमदाबाद का हिसाब यहाँ बिल्कुल उसी अंदाज में चुकता किया। मोटेरा में भारत सिर्फ तीन दिनों में ही हार गया था। इस मैच में उसने दक्षिण अफ्रीका पर तीसर ही दिन आठ विकेट से जीत दर्ज कर सिरीज 1-1 से ड्रा करवा ली। विशेष तौर पर गेंदबाजों के लिए बने विकेट पर पहली पारी में बेहतरीन 87 रन बनाने वाले सौरभ गांगुली को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया, जबकि पूरी सिरीज में मेहमानों को अपनी फिरकी के जाल में फँसाने वाले हरभजन सिंह को मैन ऑफ द सिरीज घोषित किया गया। उन्हें पुरुस्कार स्वरूप सूमो ग्रान्डे दी गई। इसके साथ ही भारतीय टीम ने अपने नए कोच गैरी कर्स्टन के माथे पर पहली ही घरलू सिरीज में हार का कलंक नहीं लगने दिया।भारत ने दूसरी पारी में जीत के लिए मिले 62 रनों के छोटे से लक्ष्य को दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। गांगुली 13 और राहुल द्रविड़ 18 रन बनाकर नाबाद लौटे। वीरन्द्र सहवाग ने दो छक्कों व एक चौके की मदद से केवल 12 गेंदों पर 22 रन बनाकर टीम को तेज शुरुआत दी। लेकिन मेजबानों को जीत तक पहुँचने से पूर्व सलामी जोड़ी लौट चुकी थी। लेकिन जीत दूर नहीं थी। द्रविड़ ने पॉल हैरिस की गेंद को फाइनल लेग से सीमा रखा के पार भेज कर इस पर मुहर लगाई। कार्यवाहक कप्तान महेन्द्र सिंह धौनी दिखा दिया कि ट्वंटी-20 और वन डे के बाद टेस्ट क्रिकेट में भी वह भारत को स्थाई नेतृत्व देने के लिए तैयार हैं। मैदान में उनकी शानदार रणनीति ने भारत का काम काफी आसान कर दिया। माही ने अपने गेंदबाजों का एक बार फिर शानदार इस्तेमाल किया। पहले हरभजन से आक्रमण की शुरुआत करवाकर मेहमानों को चौंकाया और फिर गेंदबाजों को छोटे-छोटे स्पेल देकर दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों की आँखें जमने नहीं दीं। कप्तान ने बल्लेबाजी में कुछ खास न कर सके सहवाग को पीयूष चावला पर वरीयता देकर जो पासा फेंका वह भी सही बैठा। सुबह इशान्त शर्मा और श्रीसंथ ने मेहमानों को काफी परशान किया। दोनों के बीच 46 रनों की साझेदारी ने ही बाद में दक्षिण अफ्रीका के लिए परशानी बन गई। नौ विकेट पर 288 से आगे खेलने वाली भारतीय टीम पहली पारी में 325 रन बनाकर आउट हुई। श्रीसंथ ने 2और ईशान्त शर्मा ने नाबाद14 रन बनाए। 60 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करने के बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी को 117 मिनट में केवल121 रनों पर समेट दिया। 35 रन बनाने वाले स्मिथ और पहली ही गेंद पर जीवनदान पाने वाले एश्वेल प्रिंस ने नाबाद 22 रन बनाकर कुछ संघर्ष जरूर किया। भारत के लिए एक बार फिर हरभजन सिंह ही सबसे सफल रहे। उन्होंने 44 रन देकर चार विकेट लिए, जबकि सहवाग ने सिर्फ 12 रन देकर तीन विकेट लिए। ईशान्त शर्मा ने भी बेहतरीन गेंदबाजी की और दो विकेट लिए। श्रीसंथ ने दूसरी पारी में नील मैकेन्जी को आउट कर मेहमान टीम की ताबूत में पहला कीला जड़ा। पहले दो झटके तो लंच से पहले ही लग चुके थे। हरभजन की गेंद पर हाशिम अमला भी जल्दी वापस हो लिए। पीयूष को 24 ओवर के बाद गेंद सौंपी गई लेकिन वह ज्यादा प्रभावी नहीं दिखे। लेकिन सहवाग ने स्थितियों को भुनाया और पहले कैलिस फिर कप्तान स्मिथ के रूप में भारत को दो बड़ी सफलताएँ दिलाकर उसे जीत की राह में डाल दिया। जब तक ये दोनों खेल रहे थे, तब तक ऐसा लग रहा था कि मेहमान रिकवरी कर लेंगे लेकिन लीड खत्म होते ही, सहवाग ने दोनों को विदा कर मैच पर भारत का शिकंजा कस दिया। भारत को जब चौथी सफलता मिली दक्षिण अफ्रीका की बढ़त सिर्फ 12 रन ही हो सकी थी। लेकिन ईशान्त शर्मा ने अपने नौंवे ओवर की पहली और चौथी गेंद पर बाउचर व मोर्कल को आउट करके दर्शकों के जोश को दुगना कर दिया।

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