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राज दरबार

सर्वजन की चुनावी छटाड्ढr पाँच सीटों के लिए उपचुनाव के प्रचार में सत्तारूढ़ बसपा का सर्वजन रंग खूब बिखरा। एक ओर पार्टी का पुराना काडर जिसने बहनजी के आदेश पर भरी गर्मी में सरकारी सुख-सुविधा छोड़ गाँव-देहात में घर-घर जाकर वोट माँगा वहीं दूसरी ओर पार्टी के वे नेता जो प्रचार में लटके-झटके अपना कर बगैर फिटकरी रंग चोखा करते रहे। इनमें ज्यादातर वे हैं जो दूसरी पार्टियों से बसपा में आए हैं लेकिन पुराना कल्चर नहीं छूटा। इस कल्चर वाले एक नेता ने उपचुनाव में डय़ूटी निभाने के नाम पर एसी की ठंडक में बैठ कर एसएमएस भेजकर वैश्य समाज को जोड़ने का रिकॉर्ड बनाया तो दूसर ने लखनऊ की पड़ोस की सीट पर हो रहे उपचुनाव का प्रभारी मंत्री होने का फायदा उठाकर शाम ढलते ही अपनी गाड़ी का रुख राजधानी की ओर कर लिया। बताते हैं कि अगले दिन भी उनकी सुबह तभी हो पाती थी जब प्रचार का आधा समय निकल जाता था। क्षेत्र में कार्यकर्ता ढूँढ़ते रहें तो उनकी बला से!ड्ढr आजमगढ़िया छौंकड्ढr उपचुनाव के प्रचार में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी भी रंग बिखेरने में पीछे नहीं रही। आजमगढ़ में पार्टी प्रतिष्ठा की लड़ाई में फँसी लेकिन इलाके से वास्ता रखने वाले उसके एक विधायक अरुण कुमार यादव मैदान छोड़ गए। वजह यह कि विधायकाी के पिता रमाकांत यादव भाजपा से चुनाव लड़ रहे थे। सपा नेतृत्व चाहता था कि बेटा पार्टी के प्रति समर्पण भाव रखे न कि पापा के प्रति। लेकिन वो कहते हैं न कि खून का रिश्ता. तो उसने रंग दिखा दिया। सपा वाले तलाशते रहे लेकिन विधायकाी अपने पिता के खिलाफ चुनाव प्रचार करने को तैयार नहीं हुए। मोबाइल ऑफ कर इलाका ही छोड़ दिया। सपा के विधायक अगर घर छोड़ कर निकल गए तो बसपा के उम्मीदवार डम्पी यह साबित करने के लिए आजमगढ़ वाले अपने घर की मरम्मत करवाने लगे कि पिछली बार जब आजमगढ़ से चुनाव लड़े थे तो वादा किया था कि जीते या हारं, रहेंगे आजमगढ़ में ही। जीतने के बाद नजर नहीं आए थे सो जनता इस बार भरोसा नहीं कर रही थी। फिर क्या था अपने पुश्तैनी मकान की मरम्मत में जुट गए। मरम्मत कम औैर उसका प्रचार ज्यादा करवाया। अब वे जीते तो भी इसी मकान में रहेंगे या नहीं यह तय नहीं, क्योंकि पूरा प्रचार उन्होंने खास तौर पर बनवाई गई एसी बस में किया। उसी में खाना और उसमें ही सोना यानी ठंडा-ठंडा, कूल-कूल!ड्ढr डिबिया गोलड्ढr स्टील की डिबिया में होली की मिठाई बाँटने वाले नेताजी के चेले इन दिनों मायूस हैं। समझ ही नहीं पा रहे कि चूक कहाँ हो गई कि नेताजी का दिल्ली दरबार से पत्ता ही साफ हो गया। कहाँ तो लखनऊ से चुनाव लड़ने की तैयारी में दिन-रात एक किए थे और कहाँ दिल्ली वाली लाल-बत्ती ही गुल कर दी गई। कद तो घट ही गया है ऊपर से लखनऊ की लड़ाई भी ज्यादा मुश्किल नजर आ रही है। राज्यसभा का टिकट फिर से मिलेगा या नहीं इस पर भी संदेह के बादल हैं। कानपुर में पार्टी के बड़े नेताओं की जुटान में डिबिया वाले नेताजी का बड़बोलापन ही ले डूबा। अब डैमेज-कंट्रोल कर पाते हैं या नहीं यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल तो डिबिया गोल होने के बाद जुलूस लेकर अपने घर लौट आए हैं। आगे-आगे देखिए.!ड्ढr आ बैल मुझे मारड्ढr हमेशा हड़बड़ी में रहने वाले बिजली विभाग से जुड़े एक अफसर बड़े साहबों के सामने नम्बर बढ़वाने के चक्कर में बुर फँसे। उच्चस्तरीय बैठक में अपने महकमे का राजस्व बढ़ाने के लिए वितरण कंपनियों के लिए बिजनेस प्लान तैयार करने का आइडिया दे दिया। प्लान आकर्षक था लिहाजा आला अफसरों ने हामी भर दी। अफसर ने कहा कि वह प्लान तीन दिन में तैयार कर देंगे। आला अधिकारियों ने कहा कि हड़बड़ी में गड़बड़ी होगी सो कुछ दिन और ले लीजिए लेकिन हमें प्लान चाहिए। बिजली वाले साहब ने लौटकर अपने मातहतों से बात की। उन्होंने खाका बनाया तो पता चला कि प्लान बनाने में तो महीनों लगेंगे। अफसर फिर बड़े साहबों तक पहुँचे। बताया कि इतना भारी-भरकम प्लान बनाना अपने वश का नही। इसके लिए तो कंसलटेंट चाहिए। पैसा खर्च होगा। आला अधिकारी ने कहा पैसा जारी करवा दे रहे हैं लेकिन प्लान जल्दी चाहिए। अब बिजली महकमे के अफसर ने कंसलटेंट के लिए विज्ञापन छपवाया है और मना रहे हैं कि प्लान बनाने का काम जल्दी शुरू हो जाए। उधर बड़े साहब के दफ्तर वाले चुटकी ले रहे हैं कि आ बैल मुझे मार की कहावत ऐसे ही मामलों में फिट बैठती है।ड्ढr क्या खूब कही!ड्ढr पुलिस महकमे में वाकई कई बार अजीबोगरीब काम हो जाता है। अब पता नहीं महकमे के मुखिया के प्रेस नोट्स कौन बनाता है। मसलन उनके हवाले से बताया जाता है कि अगर किसी कैदी की फरारी में पुलिसवाले शामिल पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और मुकदमा लिखा जाएगा। इस पर सीनियर पुलिस अफसर ही हैरान होते हैं। बकौल उनके-तो क्या अब तक उन्हें छूट दी गई थी कि वे ऐसा करं और उनके खिलाफ कुछ नहीं होगा!

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