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नेपाल हुआ लाल, कांग्रेस का रंग फीका पड़ा

नेपाल में चुनावी नतीजों से साफ हो गया है कि देश की संविधान सभा के चुनाव में यहां की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी नेपाली कांग्रेस को सबसे ज्यादा झटका लगा है और माओवादी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में उभर हैं। यह अस्सी की उम्र में पहुंच चुके प्रधानमंत्री गिरिाा प्रसाद कोइराला के लिए बेहद तकलीफ की बात है। कोइराला नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और उनकी पार्टी किसी तरह दूसर स्थान पर बने रहने के लिए संघर्ष कर रही है। हालांकि चुनावी नतीजों के मुताबिक, नेपाली कांग्रेस तीसर स्थान पर पहुंच गई है। पहले स्थान पर माओवादी हैं, जबकि 18 सीटों के साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) दूसरे स्थान पर आ गई है। कोईराला के परिवार के सदस्यों के लिए भी चुनावी नतीजे अच्छे नहीं रहे। उनकी उनकी बेटी सुजाता समेत सभी को भारी हार का सामना करना पड़ा है। सुजाता कोइराला को उनके पिता के राजनीतिक उत्तराधिकारी के बतौर प्रस्तुत किया जा रहा था। लेकिन वह सुंसारी 5 विधानसभा क्षेत्र से हार गई हैं। नेपाली कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष सुशील कोइराला भी बंके से चुनाव हार गए हैं। प्रधानमंत्री के निकटस्थ सहयोगी और भतीजे शेखर कोइराला को भी मोरंग में मात मिली है। हारने के साथ ही सुशील कोइराला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रविवार की शाम तक माओवादियों ने 63 विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल कर ली थी और वे 50 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए थे। लेकिन नेपाली कांग्रेस को महा 16 सीटें मिली हैं। गौरतलब है कि मई 1े आम चुनावों में नेपाली कांग्रेस कुल 205 में से 113 सीटें लेकर सबसे बड़ी पार्टी के बतौर आई थी। उस वक्त सीपीएन (यूएमएल) को 71 सीटें मिली थीं। काठमांडू में नेपाली कांग्रेस के कार्यकर्ता राजेश श्रेष्ठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोगों ने हमारी पार्टी को वोट नहीं दिया। उसके मुताबिक पार्टी आंतरिक राजनीति का शिकार बनी। हालांकि नेपाली कांग्रेस के नेता पार्टी की हार के कारणों का विश्लेषण करने में जुटे हैं, लेकिन आम लोग कहने लगे हैं कि पार्टी का खराब प्रदर्शन ही उसके हार की प्राथमिक वजह साबित हुआ। माओवादी सफल रहे, क्योंकि उनकी राजनीति जनोन्मुख रही और उन्हें सबसे अधिक युवाओं का समर्थन मिला।ड्ढr

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