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नीतीश के फोन के बाद जदयू कोटे के आठ मंत्रियों की फाइल बंद हुई

‘आपका इस्तीफा मिल गया है। मन में किसी तरह का मलाल नहीं रखिएगा। संगठन और पार्टी को मजबूत बनाइए।’ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फोन के बाद बेचैन जदयू कोटे के आठ मंत्रियों की फाइल बंद हो गयी। उधर अनिश्चितता में बैठे अन्य मंत्रियों ने मुख्यमंत्री की इस सूचना के बाद कि वे उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहे, चैन की सांस ली। रविवार की सुबह इस सूचना के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों को भले विराम लगा हो, लेकिन शनिवार की रात जदयू के मंत्रियों और विधायकों के लिए भी कयामत की रात से कम नहीं गुजरी।ड्ढr ड्ढr जदयू खेमे में शनिवार की पूरी रात बेचैनी का आलम रहा। मोबाइल से लेकर फोन की घंटियां देर रात तक घनघनाती रहीं और देखते-देखते आंखों में ही उनकी रात कट गई। सामूहिक इस्तीफा मांगे जाने के बाद से मंत्रियों ही नहीं कई ‘दावेदार’ विधायकों की भी नींद उड़ चुकी थी। देर रात 11 बजे के बाद मंजर आलम ने खुद ही मुख्यमंत्री आवास जाकर अपना इस्तीफा सौंपा, जबकि रामाश्रय प्रसाद सिंह समेत कुछ मंत्रियों ने रविवार की सुबह अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा। शनिवार की देर रात तक जदयू के मंत्री व विधायक इस सूचना को संकलित करने में जुटे रहे कि किस-किस ने इस्तीफा दिया और किसकी फाइल बन्द हो गयी है। मुख्यमंत्री आवास से इस्तीफा मांगे जाने के बाद से ही जदयू के मंत्रियों के बीच बेचैनी बढ़ने लगी। हर मंत्री अपनी स्थिति और विभाग को लेकर सशंकित था। खासकर उन लोगों के बीच भारी बेचैनी थी जिनका नाम हटाए जाने वाले मंत्रियों के रूप में आ रहा था। उनका तो समय ही नहीं कट रहा था। बिछावन पर भी करवटें बदलते रहे। इस दौरान उनके मोबाइल चालू रहे। साथी मंत्रियों से बातें करने का सिलसिला भी देर रात तक जारी रहा। नाम कटने वाले मंत्रियों ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपने ‘राजनीतिक आकाओं’ तक फरियाद लगानी शुरू कर दी। बड़े नेताओं को उनके कोटे की भी याद दिलाई गई और मंत्री यह बताने से नहीं चूके कि वे उनकी ही बदौलत तो मंत्री बने। उधर पार्टी के विधायक भी अप टू डेट जानकारी के लिए अपने सूत्रों को खंगालते रहे। जिनका नाम संभावितों की सूची में लिया जा रहा था, उन्होंने अपनी स्थिति पुख्ता करने के लिए भी जमकर मेहनत शुरू कर दी। यही नहीं सूची में नाम बना रहे, इसके लिए प्रार्थना में भी जुटे रहे। हालांकि वैसे विधायक भी रातभर खूब सक्रिय रहे, जिनका विस्तार से कुछ लेना-देना नहीं था। अलबत्ता वे विस्तार के बहाने ‘दोस्ती’ और ‘यारी’ भुनाने में व्यस्त रहे। पटना से बाहर बैठे कुछ विधायक मोबाइल से ही लेटेस्ट जानकारी लेते रहे। ड्ढr कयामत की थी शनिवार की रात!ड्ढr भोलानाथड्ढr पटना। शनिवार की रात वाकई कयामत की रात थी! एक ओर जहां राजग सरकार के मंत्रियों को इस्तीफा सौंपने का फरमान जारी हो चुका था, उसी वक्त मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए ‘चेहरों’ को रविवार को शपथ लेने का न्योता भी दिया जा रहा था। जद यू खेमे के कई मंत्रियों ने रात को ही इस्तीफा सौंप दिया था। लेकिन भाजपा के मंत्री आशंकित थे। जिस सामूहिक निर्णय की आड़ में उनसे इस्तीफा मांगा जा रहा है, वह कहीं उनका पत्ता काटने के लिए तो नहीं! इसे लेकर देर रात उनमें कशमकश जारी रहा।ड्ढr ड्ढr मंत्रियों के फोन की घंटियां घनघनाती रहीं। हालांकि, अश्विनी चौबे सहित एक-दो मंत्रियों ने ही रात को इस्तीफे दिए। बाकी मंत्रियों ने आपस में विमर्श कर रविवार की सुबह इस्तीफा सौंपने का मन बनाया। कुछेक ने अपने इस्तीफे जहां विधायक दल के नेता के नाते उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भेजा वहीं कुछ ने पार्टी अध्यक्ष राधामोहन सिंह को। भाजपा महिला कोटे से इस बार मंत्री पद की शपथ लेने वाली रणु देवी ने कहा कि मोदी जी ने उनको रात को ही सूचना दे दी थी। सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फोन कर शाम को पटना में ही रहने को कहा।ड्ढr ड्ढr मंत्री बनने के बाद भी अपनी पहली प्राथमिकता वह जनता की सेवा ही बताती हैं। व्यासदेव प्रसाद के रूप में भाजपा कुशवाहा समाज से 40 साल बाद किसी को मंत्री बनाने जा रही है। इससे पहले जनसंघ की सरकार में रामदेव महतो को मौका मिला था। श्री प्रसाद सीवान में वहां के सांसद मो. शहाबुद्दीन से लोहा लेते रहे हैं। सुबह सीएम का फोन आने से वह आह्लादित थे। अपने मंत्री बनने का श्रेय वह श्री मोदी, नंदकिशोर यादव और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह को देते हैं। इस बार विधान पार्षदों को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं देने की जबरदस्त चर्चा के बावजूद गिरिराज सिंह और अवधेश नारायण सिंह इसी कोटे से मंत्री बने हैं। दोपहर से ही भाजपा दफ्तर में फोन पर और मिलने आ रहे लोगों की बधाइयां बटोरने में लगे गिरिराज अपनी इस उपलब्धि का कड्रिट पूरी तरह से जनता को देते हैं। अवधेशजी को भी रात को ही श्री मोदी से सूचना मिल गई थी। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री उनको जो भी दायित्व देंगे उसे वह पूरी तत्परता से निभाएंगे। बांका से विधायक रामनारायण मंडल अपने निवास पर खुद ही बधाइयां स्वीकार कर रहे हैं। मंत्री बनने का श्रेय वह पार्टी आलाकमान को देते हैं और खुशी के अतिरक में उसका फैसला शिरोधार्य करते हैं।

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