अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खुफिया तंत्र की विफलता

यह मात्र संयोग नहीं है कि नेपाल में माओवादियों का वर्चस्व साबित होने के अगले दिन ही बिहार के नक्सलियों ने अपनी बढ़ती ताकत का इजहार झाझा रलवे स्टेशन पर हमला करके किया। जिस ढंग से नक्सलियों ने वारदात को अंजाम दिया, उससे यह साफ हो गया है कि उन्हें राज्य की कानून व्यवस्था की मशीनरी की कोई परवाह नहीं। वे जब, जहां चाहें, हमला बोल सकते हैं। यह वारदात राज्य के गुप्तचर तंत्र की असफलता की कहानी बयां कर रही है। इसमें कोई संदेह नहीं कि पिछले कुछ वर्षो के दौरान बिहार में नक्सली गतिविधियां बढ़ी हैं।ड्ढr ड्ढr कुछ वर्ष पूर्व तक नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र जहानाबाद, आरा, तथा कैमूर की पहाड़ियों तक ही सीमित था। लेकिन, अब राज्य के कुछ ही जिले ऐसे बचे होंगे, जहां नक्सलियों ने अपने प्रभाव का विस्तार न किया हो। खासतौर पर नेपाल से मिलने वाले बिहार के सीमावर्ती जिलों में नक्सलवादी प्रभाव बढ़ता जा रहा है। यह स्थिति सरकार के लिए आने वाले समय में गंभीर चिंता का सबब बन सकती है। जब कोई बड़ी नक्सली वारदात होती है तो सरकार की ओर से कड़े कदम उठाने की बात जोर- शोर से कही जाती है लेकिन कुछ समय बाद ही पुलिस पुन: पुराने ढर्र पर आ जाती है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उसकी नींद तब खुलती है, जब कोई दूसरी वारदात हो जाती है। वैसे तो नक्सल समस्या का विस्तार केवल बिहार में ही नहीं, देश के दूसर राज्यों में भी हो रहा है इसलिए इसके मुकाबले का काम सिर्फ राज्य सरकार के वश की बात नहीं है। केन्द्र और राज्य सरकार दोनों को इस दिशा में एक समन्वित रणनीति बनानी चाहिए। यह भी ध्यान देने की बात है कि नक्सल समस्या केवल कानून- व्यवस्था की समस्या नहीं है। यह विकास से संबंधित मामला भी है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का तेजी से विकास हो, यह सुनिश्चित किया जाना उपयुक्त होगा।ड्ढr एक ओर विकास कार्यो में तेजी लाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर पुलिस बल को भी साजोसामान से लैस किया जाना चाहिए। राज्य के जर्जर खुफिया तंत्र में तो आमूल परिवर्तन की जरूरत है अन्यथा जहानाबाद जेल ब्रक, और नरगंजो झाझा रलवे स्टेशन जैसी वारदातें आए दिन देखने को मिल सकती हैं। आशा की जानी चाहिए कि अब राज्य सरकार इस समस्या को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर ऐसे उपाय करगी, जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। ड्ढr ड्ढr राजधानी थी निशाने पर!ड्ढr पटना। क्या राजधानी एक्सप्रेस भी थी माओवादियों के निशाने पर! जिस समय माओवादियों ने हावड़ा-दिल्ली मेन लाइन स्थित झाझा स्टेशन के जीआरपी थाने पर हमला बोला ठीक उसी समय वहां से अतिमहत्वपूर्ण मानी जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस भी गुजरने वाली थी। हमले के दौरान संचारतंत्र ठप होने की वजह से राजधानी एक्सप्रेस के चालक को सिंग्नल नहीं मिल पाया जिससे उसने पूर्वी आउटर सिंग्नल के पास राजधानी को रोक दी। यह महा संयोग ही था कि उस दौरान राजधानी स्टेशन से होकर नहीं गुजरी । आशंका जतायी जा रही है कि अगर राजधानी उस वक्त स्टेशन से गुजरती तो हमलावर उसे भी निशाना बनाते। जिस तरह से डेटोनेटर व डायनामाइट से थाने को उड़या गया तथा आग्नेयास्त्रों से ताबड़तोड़ फायरिंग की गयी वैसे में राजधानी भी उनका निशाना बनता। ऐसी स्थिति में सनसनी फैलाने के अपने मकसद में वे और ज्यादा कामयाब होते।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: विशेष टिप्पणी