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पढ़ाई के चक्कर में बच्चे भूले ब्रेकफास्ट

ूल की घंटी का बच्चों पर ऐसा खौफ बढ़ रहा है कि वे सुबह-सवेर जब उठते हैं तो उनके चेहरे से नैचुरल चमक-दमक गायब रहती है। उसके स्थान पर तनाव छा चुका है। इस तनाव ने उनकी भूख-प्यास छीन ली है। नतीजा यह है कि 37 फीसदी बच्चे ब्रेकफास्ट किए बगैर स्कूल जाते हैं। 40 फीसदी बच्चे नाश्ते के नाम पर सिर्फ एक कप दूध पीकर निकलते हैं। यदि प्रापर नाश्ता करने वाले बच्चों का प्रतिशत देखें तो वह महज 23 फीसदी है। विज्ञानियों का कहना है कि बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए यह बेहद घातक है। इससे जहां बच्चों की स्कूल में परफारमेंस बिगड़ रही है, वहीं नाश्ता नहीं करने वाले बच्चे आगे जाकर मोटापे की चपेट में आ जाते हैं। मुंबई स्थित कालेज ऑफ होम साइंस तथा कैलोग की ‘स्टडी ऑन ब्रेकफास्ट हैबिट्स’ के अनुसार 12 साल की उम्र तक के 37 फीसदी, 13-15 साल के 4ीसदी बच्चे अपना ब्रेकफास्ट छोड़ रहे हैं। बच्चों के साथ-साथ बड़ों में भी नाश्ता नहीं लेने की समस्या है। मसलन, 18-30 साल के 34 फीसदी, 31-40 साल के 21 फीसदी और 40 से ऊपर आयु के 26 फीसदी लोग नाश्ता नहीं करते हैं। लेकिन बच्चों एवं बड़ों में इनके कारण अलग-अलग हैं। शोधकर्ता डा. मिताली शिवा के अनुसार बच्चों में ब्रेकफास्ट की बढ़ती प्रवृत्ति घातक है। इसके कारण और परिणाम और भी चिंताजनक हैं। शोध में पता चला कि बच्चे तनाव, गुस्से या समय नहीं होने या भूख नहीं होने के कारण नाश्ता छोड़ रहे हैं।

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