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सरकार ने गेहूं खरीद पर कमर कसी

ेंद्रीय खाद्य और नागरिक आपूर्ति सचिव टी. नंदकुमार गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर आश्वस्त हैं। उनका कहना है कि सरकार 150 लाख टन गेहूं की खरीद करने में कामयाब होगी। गेहूं के भंडार के मामले में उनका कहना है कि हमने केंद्रीय पूल में बफर मानक से 18 लाख टन अधिक गेहूं के साथ साल की शुरुआत की है। इस बार गैर-पारंपरिक क्षेत्रों से हमें अधिक गेहूं मिल रहा है। जहां तक निजी क्षेत्र की बात है तो उनके गेहूं खरीदने पर कोई पाबंदी नहीं है। सोमवार को हिन्दुस्तान के साथ एक बातचीत में खाद्य सचिव ने यह बातें कहीं। इस स्थिति ने गेहूं पर बोनस की संभावना को लगभग समाप्त कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक इस बार में अभी कोईकैबिनेट नोट तैयार नहीं किया गया है जबकि सरकारी खरीद चालू हो चुकी है। खाद्य सचिव के मुताबिक गेहूं का उत्पादन 7.4 करोड़ टन रहने का अनुमान है। बिहार में इस साल अच्छी फसल की सूचना है। जबकि मध्य प्रदेश जसे राज्य से 2.5 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है।हरियाणा और पंजाब जरूर अभी पीछे हैं। इसका कारण पिछले दिनों हुई बारिश है।केंद्रीय पूल में खाद्यान्न भंडार पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय पूल में एक अप्रैल को 58 लाख टन गेहूं था जबकि बफर मानक 40 लाख टन है। चावल की खरीद 220 लाख टन पार कर पहुंच चुकी है। जो पिछले साल इस समय 200 लाख टन पर थी। चावल के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्थिति प्रतिकूल है लेकिन घरलू मोर्चे पर हम संतोषजनक स्थिति में हैं। निजी कंपनियों पर 10,000 टन और 25,000 टन गेहूं खरीद करने पर क्रमश: राज्यों व कें द्र को रिटर्न जमा करने की शर्त क्यों लगाई गई है? इस पर उनका कहना था कि यह जानने के लिए कि उनके पास कितना अनाज है। उनकी खरीद पर रोक नही है। इस खरीद पर लगने वाले पैसे का स्रेत जानना भी एक मकसद है। इससे काले धन का उपयोग कर सट्टेबाजी क रने की संभावना समाप्त हो सकेगी। पंजाब और हरियाणा से अधिक गेहूं मिलने की उम्मीद जताते हुए नंदकुमार ने कहा कि वहां कर की दरं 12.5 फीसदी तक है। कई राज्यों में यह इससे आधी हैं। जिसके चलते निजी कंपनियां मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश जसे राज्यों में अधिक खरीद करंगी।

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