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अब सस्ते लोन पर खरीद सकेंगे कार

महंगे लोन और उपर से आसानी से उपलब्धता नहीं होने के चलते कार बाजार में मंदी आ गई थी, लेकिन बजट में उत्पाद शुल्क घटाने के बाद फिर से रंगत लौटने लगी है। कई नामचीन कंपनियां कार फाइनेंस बाजार में जान फूंकने की कोशिश में जुट गई हैं तो कुछ उतरने को बेकरार हैं। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ ही ऑटो लोन की दरं कम होने की उम्मीद है। प्रमुख वित्तीय कंपनी कार्बी स्टॉक ब्रोकिंग (केबीएसएल) किसी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी के अधिग्रहण के जरिए ऑटो लोन में उतरना चाहती है। कार्बी के एक एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अधिग्रहण के लिए 4-5 नॉन बैंकिग फाइनेंस कंपनी संपर्क किया है तथा मई के मध्य में सौदा तय हो जाएगी। कंपनी का मकसद रिटेल ग्राहकों को ऑटो और पर्सनल लोन देने वाला बड़ा फाइनेंसर बनना है। वहीं टाटा मोटर फाइनेंस, रिलायंस कैपिटल, श्रीराम सिटी यूनियन, एक्िसस बैंक, बार्कलैज बैंक आदि मुसीबतों से घिर कार फाइनेंस बाजार में जान फूंकने की कवायद में जुट गई हैं। वर्तमान में फाइनेंस कंपनियां और बैंक पुरानी कार की कीमत 60-70 फीसदी और नई कारों के दाम का 0 फीसदी तक फाइनेंस कर रहे हैं। कार लोन पर रैक रट 14 फीसदी जा पहुंचा है, जो बीते कुछ सालों में सबसे ज्यादा है। लगरी कार कंपनियां भी फाइनेंस सुविधा उपलब्ध कराने की कवायद आरंभ कर दी है। मर्सडीा बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जसी लोकप्रिय लगरी कार निर्माता भी आसान मासिक किश्तों पर भारतीय ग्राहकों को कारं उपलब्ध कराएगी। देश में कारों की कुल बिक्री में 75 प्रतिशत कारं फाइनेंस के जरिए उठाई जाती है। इनमें से लगरी कार की हिस्सेदारी अभी बहुत कम है। उल्लेखनीय है कि ऑटो उद्योग की कुल बिक्री का करीब 60 फीसदी हिस्सा स्विफ्ट, आल्टो, इंडिका और सेंट्रो वाले बी सेग्मेंट में आता है और इसमें रफ्तार बने रहने की उम्मीद है। इसके अलावा मिड-साक्ष सेग्मेंट में होंडा सिटी, एसएक्स 4, शेवरले ऑप्ट्रा और टोयटा कोरोला जसी गाड़ियां है। वहीं यूज्ड कारों में मारुति 800, एस्टीम और बलेनो लोकप्रिय है।

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